wolf and seven little goats(बकरी और भेड़िया की कहानी) short story|Hindi kahaniya

wolf and seven little goats(बकरी और भेड़िया की कहानी) short story|Hindi kahaniya

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कहानी की सुरुवात

किसी जंगल मे एक छोटे से घर मे एक बकरी अपने छोटे छोटे बकरी के बच्चे के साथ रहती थी। बच्चे बहुत सुन्दर थे और बील्कुल खिलौने की तरह दिखते थे। 

माँ बकरी अपने बच्चो का बहुत ध्यान रखती थी उन्हे सभी जंगली जानवरो से बचाती थी। एक दिन mother goat (मां बकरी) खाना ढूँढने के लिये बाहर जा रही थी। 
उसने अपने सभी बच्चो को एक साथ बुलाया और उन्हे कहा जब तक मै वापस नही आऊँ तब तक किसी के लिये भी दरवाजा मत खोलना। मां बकरी (mother goat) ने अपने बच्चो को बताया की एक भेड़िया वेश बदल कर तुम्हे ठगने की कोशिश करेगा। 
अगर वह भेडीया आन्दर आ जायेगा तो तुम सबको खा जायेगा। तुम इसका ध्यान रखना। तभी एक बच्चा बोलता है मां हम उसे कैसे पहचानेगे? 
मा बकरी बताती है मेरी आवाज पतली है और उस भेड़िया की आवाज रुखी है और हां उस भेडिये के पैर काले है और मेरे सफेद हैं। इसका ध्यान रखना।

यह कह कर बकरी बाहर खाना ढूँढने चली गई और बच्चो(little goat) ने दरवाजा बन्द कर लिया। भेड़िया (wolf)यह सब एक पेड़ के पीछे छुपकर देख रहा था। 

मां बकरी के जाने के बाद भेड़िया थोडी देर तक रुका और फिर वह बकरी के घर पहुंच गया और दरवाज़ा खटखटाने लगा। 【Hindi kahaniya】
दरवाज़ा खटखटाते हुए भेड़िया बोलता है चलो मेरे प्यारे बच्चों दरवाजा खोलो मम्मी तुमलोगो के लिये खाना लाई है।

बकरी के बच्चो (little goats) ने भेड़िया की आवाज पहचान ली। तुम हमारी मां नही हो । तुम्हारी आवाज़ बहुत रुखी है और हमारी मां की मीठी और पतली आवाज है। 

चलो यहा से भागो भेडिये तुम हमे बुद्धु नही बना सकते। भेड़िया को बहुत गुस्सा आया क्युंकि वह बच्चो को बेवकूफ नही बना पाया । भेड़िया  वहां से चला गया।  
भेड़िया ने इस बार एक चौक खा लिया जिसे उसकी आवाज थोडी मीठी हो गई। भेड़िया फिर से बकरी के घर जाता है और दरवाजा खटखटाते हुए अपनी मीठी आवाज मे बोलता है। 【Hindi kahani】
 बच्चो दरवाज़ा खोलो मम्मी खाना लाई है। इस बार मीठी आवाज सुन कर बच्चे दरवाजा खोलने ही वाले थे की उनमें से एक बकरी का बच्चा बोलता है।
 ठहरो! दरवाजा खोलने से पहले दरवाजे के निचे से एक बार पैर देख लो। एक बच्चे ने निचे से देखा की उसके पैर काले है। सभी बच्चे (little goats) एक साथ बोले तुम्हारे पैर काले है।
 मम्मी के पैर सफेद हैं तुम हमारी मम्मी नही हो। हम दरवाज़ा नही खोलेंगे। भेड़िया अपने गुस्से को दबाकर वहां से चला जाता है।

अब भेड़ीया एक दुकान मे गया। दुकानदार  भेड़ीये को देख कर चौक गया। भेड़िया ने कहा अब मै शाकाहारी हो गया  हूं। मुझे आटा चाहिये दुकानदार ने उसे आटा दे दिया। 

भेड़िया वापस जंगल आता है और अपने पैरो पर आटा लगा लेता है। तीसरी बार भेड़िया दरवाजा खटखटाता है। और इस बार पैर सफेद होने के वजह से बच्चे दरवाज़ा खोल देते है।
 छोटे बकरी के बच्चे भेड़िया को दरवाजे पर देख घबरा जाते है और इधर उधर भाग कर छुप जाते है। 

The wolf and the seven little goats moral kahani|Hindi kahaniya

एक बच्चा पर्दे के पीछे,एक घड़ी के भीतर घुस जाता है, चिंमनी मे, एक टेबल के निचे,एक सोफे के पीछे, एक किचन मे, एक दरवाजा के पीछे । लेकिन भेडीया बहुत चालाक था।
 उसने एक एक कर 6 बच्चो को ढूंढ निकाला और उन्हे निगल गया। एक बच्चा जो घड़ी मे छुपा था वह बच गया। तब तक भेड़िया का पेट भर चुका था। 
भेड़िया वहां से चला जाता है और एक पेड़ के निचे जा कर सो जाता है। वह बहुत गहरी नींद मे सोया था उसके खराटे से आस पास के पौधे पत्तियां हिल रही थी।

मां गोट जब वापस आती है तो उसने अपने घर का दरवाज़ा खुला देखा। जिसे देख कर वह बहुत घबरा जाती है और दौड़ते हुए अपने घर के अंदर जाती है।

 वहां सभी समान इधर उधर जमीन पर पड़ा देख वह जोर जोर से रोने लगी और एक एक कर सभी बच्चो का नाम लेकर बुलाने लगी। जब मां बकरी ने उस बच्चे का नाम लिया जो घड़ी मे छुपा हुआ था।
 तब उसने घड़ी के अंदर से कहा मै यहां मां। मां बकरी ने उसे बाहर निकाला। उसे गले लगा कर खुब रोई मां बकरी,तभी बचे ने उसे बताया की भेड़िया ने मेरे सभी भाई बहनो को निगल गया।
मां बकरी और बच्चा बाहर जंगल मे भेड़िया की खोज मे जाते है। वह देखते है की भेड़िया पेड़ के निचे सो रहा है तभी मां बकरी देखती है की भेड़िया के पेट मे कुछ हिल रहा है। 【Moral stories in Hindi 】
यह देख कर उसे लगता है की उसके बच्चे अभी भी जिंदा है। बकरी एक प्लान बनाती है। उसने बच्चे बकरी को बुला घर से सुई, धागा,और कैंची ले कर आओ। 
तब तक बकरी ने 6 पत्थर चुना। बकरी मां भेड़िया के पास जाती है और उसके पेट को कैंची से फाड देती है। बच्चे भेड़िया के पेट मे जिंदा रहते है एक एक कर वह बाहर आ जाते है। उन्हे देख मां बकरी बहुत खुश होती है।
 वह 6 पत्थर उसने भेड़िया के पेट मे रख दिया और उसके पेट को सिल दिया। बकरी अपने बच्चों को ले कर घर चली जाती है। इधर भेड़िया नींद से उठता है उसे प्यास लगती है वह खड़ा होता है तो उसे पेट मे दर्द मेहसूस होता है।  【the wolf and the seven little goats moral】
उसे लगता है की उसने पत्थर खा लिये हो और वह पत्थर उसके पेट मे टकरा रहे हैं। वह नदी के किनारे पानी पीने पहुँचता है। 
जब वह पानी पीने के लिये निचे झुका वह डगमग गया। दुसरी बार उसने फिर से कोशिश की। इस बार वह पत्थर की भार से नदी मे गीर गया। उसे बचाने के लिये वहां कोई नही था भेड़िया वही नदी मे डूब गया।
उस दिन के बाद से बकरी अपने घर मे अपने बच्चो के साथ बहुत अच्छे से खुशी खुशी रहने लगी।
आशा करता हूं की आपको यह wolf and 7 little goat  story hindi me acchi लगी होगी। और भी मजेदार hindi kahaniya पढ़े निचे और भी हैं।

निष्कर्ष 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको  wolf and seven little goats short story |Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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