स्टीव जॉब्स का जीवन परिचय | STEVE JOBS BIOGRAPHY IN HINDI

 अपने अभी तक हो सकता है बहुत सारे blogposts पढ़ लिए होंगे पर यह article सबसे अलग है क्यू की यह article मैंने original biography को पढ़ कर लिखा है । इस article मे वो जानकारियाँ है जो आपको कहीं और  नहीं मिलेंगी । मुझे आशा है आपको  स्टीव जॉब्स का जीवन परिचय | steve jobs biography in hindi पसंद आएगी । 
पूरा नामस्टीव पॉल जॉब्स
जन्म24 फरवरी 1955
जन्म स्थानसेंट फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया
माता – पिताजोअन्नी सिम्पसन – अब्दुलफत्तः जन्दाली (असली माता पिता)
पत्नी• लोरिन पॉवेल (1991-2011)
• किर्स्टन ब्रेन्नन
बच्चे• लिसा ब्रेन्नन
• रीड जॉब्स
• एरिन जॉब्स
• ईव जॉब्स
Famous है क्यू की• पर्सनल कंप्यूटर मैक बनाया
• एप्पल के फाउंडर
• नेक्स्ट के फाउंडर
मृत्यु5 अक्टूबर 2011 (कैलीफोर्निया)
राष्ट्रीयताअमेरिकन
धार्मिक मान्यताबौद्ध धर्म
कुल सम्पत्ति (Steve jobs Net Worth)$10.2 Billion
सक्रिय वर्ष1974 – 2011
उत्पादApple Computer, iMac, Apple Stores, iTunes, iTunes Store, iPhone, App Store, iPad
शिक्षा•होमेस्टेड हाई स्कूल (1972)
• रीड कॉलेज
• मोंटा लोमा एलिमेंट्री स्कूल
मृत्यु का कारणNeuroendocrine cancer
मृत्यु स्थानपोलो आल्टो, कैलिफोर्निया
SignatureFile:Steve Jobs signature.svg - Wikimedia Commons
STEVE JOBS BIOGRAPHY IN HINDI

Table of Contents

स्टीव जॉब्स कौन है ? ( Who is steve jobs )

स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी 1955 को हुआ और उनकी मृत्यु 5 अक्टूबर 2011 को हुई।  स्टीव जॉब्स एक अमेरिकन बिजनेसमैन, बहुत बड़े इन्वेंटर थे। उन्होंने आईफोन, आईपैड और मैकबुक जैसे रिवॉल्यूशनरी प्रोडक्ट्स बनाएं ।

स्टीव जॉब्स के शुरुआती जिंदगी कैसी रही ? (Early lIfe of Steve Jobs)

स्टीव जॉब का जन्म सन फ्रांसिस्को में हुआ, उनके माता-पिता Joanne Schieble और John Jandali यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स थे और इन दोनों की उस टाइम शादी नहीं हुई थी इसलिए स्टीव जॉब्स को एडॉप्शन के लिए दे दिया गया।

फिर स्टीव को पॉल और क्लारा जॉब्स ने अडॉप्ट कर लिया, पॉल जॉब्स, स्टीव जॉब्स को हमेशा इंस्पायर करते थे और अपने गैराज में इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ उनको एक्सपेरिमेंट करने के लिए कहते थे उन्हीं के वजह से स्टीव जॉब्स में इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रति रुझान आया।

उन्होंने स्कूल और कॉलेज अटेंड तो किया लेकिन स्कूल की पढ़ाई में उन्हें कभी मन नहीं लगा और उनकी टीचर और उनमें कभी भी बनी नहीं।

स्टीव जॉब्स भारत में कैसे आ गए ? (Steve Jobs in India )

स्टीव जॉब्स के एक दोस्त थे जिनका नाम रोबर्ट Friedland था, उन्होंने स्टीव को इंडिया के बारे में बताया क्योंकि वह खुद इंडिया जा कर आ चुके थे और वह भी बहुत सारे बाबा और पंडितों से मिल चुके थे।

स्टीव को तभी से जिज्ञासा थी इंडिया के बारे में और वह भी इंडिया एक बार जाना चाहते थे और अपने गुरु को ढूंढना चाहते थे।

1974 में स्टीव जॉब्स अपने लाइफ के प्रति बहुत कंफ्यूज थे, उनके मन में बहुत सारे सवाल थे, उनको एक गुरु की जरूरत थी। उनको अपने असली मां और बाप के बारे में पता नहीं था इसके वजह से भी उनके अंदर बहुत सारे सवाल पनप रहे थे।

जॉब्स इन सभी चीजों के कारण इंडिया जाके किसी गुरु को ढूंढना चाहते थे और अपने आप को समझना चाहते थे, इंडिया जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे इसके लिए उन्होंने Atari को जॉइन किया अटारी उस समय की बहुत बड़ी वीडियो गेम कंपनी थी और उसमें बहुत सारे लोगों की जरूरत पड़ती रहती थी।

स्टीव को हायर कर लिया गया और स्टीव अटारी में काम करने लगे, अटारी में काम करके स्टीव ने कुछ पैसे जुटाए और वह अपने एक दोस्त डेनियल कोटके के साथ भारत की यात्रा पर निकल पड़े।

जैसे ही स्टीव जॉब्स अपनी फ्लाइट से न्यू दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे उन्हें इंडिया की गर्मी महसूस हुई फिर वह अपने होटल की तरफ चल पड़े।

पर उनका होटल बुक था तो टैक्सी ड्राइवर ने उन्हे दूसरे होटल को सजेस्ट किया और स्टीव जॉब्स वहां रहने चले गए
स्टीव ने होटल वाले से पहले ही सब कुछ पूछ लिया और जांच-पड़ताल कर ली।

स्टीव ने पहले ही होटल वालों से पूछ लिया था कि यहां पर साफ-सफाई है या नहीं या पानी अच्छा मिलता है या नहीं, होटल वालों ने भी सारी चीजों में हां में हां मिला दिया और कह दिया कि यहां सारी व्यवस्था है।

पर ऐसा नहीं था गंदे पानी को पीने की वजह से स्टीव को Dysentrty यानि उनका पेट खराब हो गया।
स्टीव कुछ समय अस्पताल में रहे उसके बाद वह भारत भ्रमण पर निकल गए, दिल्ली से स्टीव हरिद्वार के लिए निकल गए।

उस समय हरिद्वार में कुंभ मेला लगा हुआ था स्टीव बहुत सारे गुरुओं से मिले उन्होंने बहुत सारी अनोखी चीजें देखी स्टीव हरिद्वार से नैनीताल की तरफ निकल पड़े क्योंकि उन्होंने नीम करोली बाबा के बारे में सुन रखा था और वह उनसे मिलना चाहते थे पर जब तक वह पहुंचे नीम करोली बाबा समाधि ले चुके थे इस वजह से स्टीव उनसे मिल नहीं पाए।

स्टीव वहीं पर एक लोकल के यहां रूम रेंट पर लेकर रहने लगे उस रूम में करने के लिए कुछ नहीं था वहां पर बस एक बुक थी जिसका नाम था “एन ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी” जैसा की उस गांव में कुछ करने के लिए नहीं था तो स्टीव उसी किताब को बार-बार पढ़ते थे।

स्टीव वहां पर कुछ दिन रहे और फिर वह वहां से भी चल दिए, वो गाँव गाँव घूमे और इंडिया को समझा, फिर स्टीव ने अचानक से फिर से एक हिंदू गुरु के बारे में सुना जो बड़े बिजनेसमैन के घर पर एक सत्संग करवा रहे थे।

स्टीव अपने आप को रोक नहीं पाए और वह उस हिंदू गुरु से मिलने के लिए चल दिए, उन्होंने सोचा कि “मैं जाकर वहां पर उस गुरु से मिल भी लूंगा और मुझे अच्छा खाना खाने को भी मिल जाएगा” क्योंकि स्टीव एक वेजिटेरियन थे और उन्हें वेजीटेरियन खाना बहुत पसंद था।

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स्टीव उस सत्संग में पहुंच गए जहां पर वह गुरु अपना प्रवचन दे रहे थे स्टीव ने थोड़ा देर उनका प्रवचन सुना फिर वह खाना खाने के लिए निकल पड़े जैसे ही वह खाना खाने लगे उस गुरु की नजर स्टीव पर पड़ी और वह गुरु अपनी जगह से उठे और स्टीव की तरफ आगे बढ़ने लगे फिर उन्होंने स्टीव का हाथ पकड़ा और जोर जोर से चिल्लाने लगे कि यह देखो यह तो बच्चा है यह देखो यह तो बच्चा है स्टीव को यह अटेंशन अच्छा नहीं लग रहा था वह अपनी बेज्जती बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे।

फिर उस गुरु ने स्टीव का हाथ पकड़ कर, एक छोटे से पहाड़ पर ले गए जहां पर एक हैंडपंप और एक छोटा सा तालाब था, और उस गुरु ने अपने पास से एक अस्तुरा निकाला, अस्तुरे को देखकर स्टीव डर गए पर उन्होंने कुछ किया नहीं और वह बैठे रहे उस गुरु ने कहा कि मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं और यह बोलकर उसने स्टीव के सारे बालों को छील दिया, अब स्टीव पूरी तरह से टकले हो चुके थे।

इस समय तक स्टीव गुरु के कांसेप्ट से ऊब चुके थे फिर हो सिर्फ इंडिया के एक्सपीरियंस को लेने के लिए घूमते रहे फिर उन्होंने डिसाइड किया की उन्हे वापस घर जाना चाहिए।

फिर वह इंडिया से फ्लाइट पकड़कर अमेरिका चले गए, अमेरिका में जब स्टीव के मां-बाप उसे घर लेने के लिए एयरपोर्ट आए तो वो स्टीव को ढूंढ ही नहीं पा रहे थे क्योंकि स्टीव का हुलिया पूरी तरह से बदल चुका था ।

उनके बाल नहीं थे और उन्होंने हिंदू चोंगा पहना हुआ था और उनका जो स्किन टोन था वह भी चेंज हो चुका था क्योंकि गर्मी में घूमते घूमते उसका शरीर भून चुका था।

कुछ देर के बाद उनकी मां ने स्टीव को आवाज लगाई कि स्टीव क्या यह तुम हो फिर स्टीव ने हामी भरी है और फिर वह वहां से अपने घर चले गए।

स्टीव जॉब्स 7 महीनों तक इंडिया में रहे और उन्होंने यहां बहुत कुछ सीखा और अपनी जिंदगी में उसे उतारा भी।

स्टीव जॉब्स ने कॉलेज ड्रॉपआउट क्यों किया था (Steve Jobs College Dropout Story)

स्टीव जॉब्स ने रीड कॉलेज में एडमिशन लिया था जो कि एक लिबरल आर्ट्स कॉलेज था उस कॉलेज का एनवायरमेंट बहुत ही cool और chill था । वहां के लोग भी बहुत chill थे पर कॉलेज का मैनेजमेंट बहुत ही स्ट्रिक्ट था और सारे क्लासेज को अटेंड करना.. सारे स्टूडेंट के लिए मैंडेटरी था ।

स्टीव को जब यह सब पता चला तो वह बहुत गुस्सा हुए, जब उनके फ्रेंड स्टीफन वॉजनीयक स्टीव से मिलने उनके कॉलेज आए तो स्टीव बहुत गुस्से में थे और उन्होंने अपने दोस्त से कहा कि

“यह क्या यार यहां पर तो क्लासेस लेने के लिए बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स है
मुझे इनके बताए गए क्लासेस में नहीं जाना”

फिर स्टीव को जो क्लासेस पसंद आते थे वो उसी में घुस जाते थे और इंजॉय करते थे उन्हें डांस क्लासेस पसंद था क्यों कि वह क्लास क्रिएटिविटी से भरा होता था और वहां पर बहुत सारी लड़कियां भी आती थी।

लेकिन फिर स्टीव को गिल्टी फील होने लगा क्योंकि उस कॉलेज की फीस बहुत ज्यादा थी और वह उस कॉलेज में पढ़ाई नहीं कर रहे थे फिर उन्हे लगा कि मैं अपने पेरेंट्स की लाइफ सेविंग को क्यों बर्बाद कर रहा हूं जब मुझे मेरे मतलब का ज्ञान इस कॉलेज में मिल ही नहीं रहा है।

स्टीव Dropout नहीं करना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसलिए ड्रॉप आउट किया क्योंकि उन्हें जो कोर्स बताया गया था वह उनके मतलब का था ही नहीं और उनके पैरंट्स के पैसे भी जाया हो रहे थे।

आगे जाकर स्टीव को स्टैनफोर्ड में एक बार स्पीच देने के लिए बुलाया गया उन्होंने अपने स्पीच में कहा कि

“उस समय मुझे पता ही नहीं था कि मुझे लाइफ में क्या करना है और उस समय मुझे यह भी नहीं पता था कि कॉलेज मेरी इस परेशानी में कैसे मदद करेगा इसलिए मैंने अपने पेरेंट्स का पैसा जाया करना जरूरी नहीं समझा और कॉलेज ड्रॉप आउट कर लिया ।”

Jack Dudman, जो कि Reed College के Dean थे, वह कहते हैं कि स्टीव जॉब्स का दिमाग बहुत ही इंक्वायरिंग था वह किसी भी बात को तुरंत एक ही बार में मान नहीं लेते थे वह हर चीज की इंक्वायरी करते थे कि वह बात सही है या नहीं, जब तक खुद सोच समझ ना ले वो किसी की भी बात पर विश्वास नहीं करते थे।

फिर jack Dudman ने steve को college से निकाला नही, अब स्टीव कॉलेज में फीस तो नहीं देते थे लेकिन कॉलेज आते जरूर थे।

वह कॉलेज आते थे और जो भी क्लासेज उनको इंटरेस्टिंग लगती थी उसमें वह घुस जाते थे ऐसा ही एक क्लास था कैलीग्राफी का, उस क्लास के पोस्टर को बहुत ही खूबसूरती के साथ डिजाइन किया गया था स्टीव जॉब्स को यह चीज इंटरेस्टिंग लगी और वह उस क्लास में जाने लगे।

स्टीव जॉब्स ने फिर यहीं से fonts के बारे में बहुत सारी चीजें सीखी फिर इन सारी चीजों का अप्लाई इन्होंने अपने आईफोन के कीबोर्ड में किया।

आईफोन का कीबोर्ड बहुत ही अट्रैक्टिव थे और उनके जो fonts होते थे वह भी बहुत प्रैक्टिकल और खूबसूरत लगते थे, स्टीव जॉब्स ने $20 पर मंथ पर एक अपार्टमेंट किराए पर ले रखा था और वह खाली पैर ही कॉलेज आ जाते थे।

पैसे की जरूरत पड़ने पर वो एक एनिमल लैब मे टेक्निकल काम ले लेते थे जिनके उन्हे कुछ पैसे मिल जाते थे।

Steve Wozniak कौन है? और Steve Jobs के Life मे उनका क्या योगदान है (Steve Wozniak Introduction and his contribution in Steve Jobs Life)

स्टीव वॉजनीयक कौन है ? (Who is Steve Wozniak)

स्टीव वोजनियाक, स्टीव जॉब्स से 5 साल बड़े थे और उनको इलेक्ट्रॉनिक्स के बारे में स्टीव जॉब्स से ज्यादा जानकारी थी।
स्टीव वोजनियाक भी स्टीव जॉब्स की तरह ही थे वह भी अपना ज्यादातर टाइम अपने पिता के साथ ही बिताते थे।

स्टीव वोजनियाक के पिता फ्रांसिस वोजनियाक एक रॉकेट इंजीनियर थे और वो लॉकहीड मार्टिन में काम किया करते थे वह बचपन से स्टीव वोजनियाक को इलेक्ट्रॉनिक्स के बारे में सिखाते रहते थे ।

उन्होंने स्टीव वोजनियाक को बचपन से ही सिखा दिया था कि ट्रांजिस्टर कैसे काम करते हैं इसी की वजह से बचपन से ही स्टीव वोजनियाक के अंदर इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रति रुचि थी और वह बचपन से ही ऐसे ऐसे मशीन बना लिया करते थे जो उनकी उम्र के लोगों को समझ तक नहीं आता था।

1950’s के टाइम में hellicrafter नाम के रेडियोज बहुत ही famous थे । उस Radio की खास बात यही थी की वह बहुत ही High tech हुआ करती थी फिर भी इतना high tech होने के बावजूद स्टीव वोजनियाक अपने बचपन में ही इसे खोल कर जोड़ देते थे।

बचपन मे यह जीतने smart थे उतने शरारती भी थे । एक बार की बात है इन्होंने Tick Tick करने वाला एक डिवाइस बनाया था जिसे Bomb का सकल देकर इन्होंने अपने स्कूल के एक अलमारी में छुपा दिया जिसके बाद वहां पुलिस आई और बहुत हंगामा हुआ इसके वजह से इन्हें कुछ दिनों के लिए सस्पेंड भी कर दिया गया था।

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फिर आगे जाकर उन्होंने एक कंपनी में जॉब स्टार्ट किया जो कैलिफोर्निया मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट के लिए कंप्यूटर्स बनाया करती थी उस कंपनी ने वॉजनीयक को एक ऑफर दिया उन्होंने कहा कि अगर तुम कम से कम चिप्स को यूज करके एक कंप्यूटर बना सकते हो तो हम तुम्हें इनाम देंगे और वह offer वॉजनीयक को बहुत अच्छा लगा और उन्होंने वैसा कंप्यूटर बनाना स्टार्ट कर दिया।

पर इस मशीन पर काम करने के लिए उनके पास कोई जगह नहीं थी फिर उनके एक दोस्त बिल Fernandez ने वॉजनीयक को बताया कि उसके पास एक खाली गेराज है वहां पर वह काम कर सकते हैं फिर स्टीव वोजनियाक बिल फर्नांडिस के साथ उसके गैराज में काम करने लगे। बिल Fernandez, स्टीव वोजनियाक से जूनियर ही था और वह होमस्टेड हाई में पढ़ा करता था।

स्टीव वॉजनीयक और स्टीव जॉब्स कैसे मिले ( How Steve Jobs and Steve Wozniak met )

बिल फर्नांडिस ने स्टीव वोजनियाक को बताया कि उसके हाई स्कूल, होमस्टेड हाई में एक बंदा है जिसका नाम स्टीव जॉब्स है वह भी तुम्हारी तरह ही सोचता और behave करता है, तुम्हें उससे मिलना चाहिए।

तो एक बार की बात है स्टीव वोजनियाक और स्टीव जॉब्स, बिल फर्नांडिस के बोलने पर मिलते हैं और दोनों की बहुत अच्छी बनने लगती है।

उन दोनों में बहुत सारी कॉमन बातें थी दोनों एक दूसरे से तुरंत कनेक्ट हो गए। स्टीव वोजनियाक के बारे मे स्टीव जॉब्स कहते हैं कि स्टीव वोजनियाक बहुत ही स्मार्ट और अपने उम्र से बहुत ही कम mature है जिसके वजह से हम दोनों में बहुत ही बनती थी और स्टीव वोजनियाक, स्टीव जॉब्स के बारे मे कहते है कि स्टीव बहुत ही पतला दुबला लड़का था और उसकी बाते मेरे interest और level की होती थी और मुझे स्टीव से बात करके बहुत अच्छा लगता था और हम दोनों के जो इंटरेस्ट है वह भी बहुत मिलते-जुलते थे।

स्टीव जॉब्स और स्टीव वोजनियाक दोनों इलेक्ट्रॉनिक्स और म्यूजिक में इंटरेस्टेड थे, दोनों को Bob Dylan के गाने बहुत ही अच्छे लगते थे।

ब्लू बॉक्स और स्टीव वोजनियाक and स्टीव जॉब्स के बीच पार्टनर शिप की शुरुआत (Bluebox and steve jobs, Steve Wozniak partnership)

1960’s के समय अगर आपको long-distance बात करनी होती थी तो पहले आपको Telecomuncation companies को एक extra charge देना पड़ता था उसके बाद telecommunication companies एक Tone का use करती थी जो की एक खास frequency पर बजता था जिससे user को authorization मिल जाता था और उसका call बताए गए number पर लग जाता था ।

तो स्टीव वोजनियाक एक दिन एक आर्टिकल पढ़ रहे थे और उन्हें उस आर्टिकल से पता लगा की कैसे एक चोर ने एक candy wrapper से वो frequency वाली tone बना ली थी जिससे वो long distance free मे बाते किया करता था ।

उन्होंने स्टीव जॉब्स को कॉल लगाया और इसके बारे में बात की
फिर दोनों ने डिसाइड किया कि वह एसा डिवाइस बनाएंगे जो उस खास Frequency का sound या Tone को produce करेगा जिससे वह फ्री में लॉन्ग डिस्टेंस कॉल कर सकेंगे ।

वह दोनों लाइब्रेरी में गए और उन्होंने बहुत सारे किताबे छानमारे जिसमें पता चल सके कि किस frequency पर वो Tone Generate होता है जिसकी उस Article मे बात की जा रही है । जब उन्हें उस Tone और Frequency के बारे में पता लगा तो उन्होंने मशीन बनाना चालू कर दिया ।

पर शुरुआत मे जो मशीन बना वो stable नहीं था इसलिए वह मशीन ने काम नहीं किया फिर स्टीव वोजनियाक अपने कॉलेज वापस लौट गए।

फिर स्टीव वोजनियाक ने अपने कॉलेज में ही उस मशीन का डिजिटल वर्जन बनाना स्टार्ट कर दिया और जब वह device बन गई तो वह फिर स्टीव जॉब्स से मिलने आए और फिर स्टीव वोजनियाक ने अपने अंकल जो की Los Angeles मे रहते है उनको कॉल लगाया और वह दोनों खुशी से झूमने लगे क्योंकि वह कॉल लग गया था और वह फ्री में long Distance बात कर रहे थे। दोनों ने इस Device का नाम blue Box रखा ।

फिर उन्होंने सोचा कि वह इस मशीन को बेच सकते हैं और बहुत पैसे बना सकते हैं जब उन्होंने Calculate किया तो उन्हें पता चला कि इस पूरे मशीन को बनाने में 40 से 50 Dollars लगेंगे और वह इस मशीन को डेढ़ 100 Dollars में बेच सकते हैं।

उन्होंने बहुत सारे लोगों को इस मशीन के बारे में बताया और बहुत लोगों ने इस मशीन को खरीदा भी।
फिर एक दिन स्टीव वोजनियाक को पैसों की बहुत जरूरत थी , स्टीव जॉब्स और स्टीव वोजनियाक दोनों sunnyvalle pizza पार्लर में बैठे हुए थे तो उन्होंने अचानक बगल में बैठे एक आदमी से इस ब्लूबॉक्स को लेने की रिक्वेस्ट की फिर उन्होंने इस बॉक्स का डेमोंसट्रेशन दिखाया ।

फिर उस आदमी ने कहा कि उसने पैसे अपने car मे रखे है और वह आदमी अपनी car की तरफ चला गया जॉब्स और वॉजनीयक भी उसके पीछे पीछे चल दिए पर वह आदमी बहुत ही खतरनाक था ।

उसने कार के अंदर से एक गन निकाला और स्टीव जॉब्स के पेट पर उसे टीका दिया और कहा

“इस बॉक्स को मुझे दे दो अगर यह काम करता है तो मैं तुम्हें वापस कॉल करूंगा और पैसे दे दूंगा ”

और वह आदमी इन दोनों से वह बॉक्स को लेकर चल देता है।

हालांकि इस incident के बाद वह दोनों बहुत डर जाते हैं पर वो यह भी समझ जाते है कि उन्होंने ऐसी चीज बनाई है जो बिलीयन डॉलर्स कंपनीस को कंट्रोल कर सकती है और उन्हें अपने उपर बहुत कॉन्फिडेंस आता है।

और वह समझ जाते हैं कि वह बहुत सारी चीजें बना सकते हैं और बेच सकते हैं और उसी दिन से उन दोनों का पार्टनरशिप स्टार्ट हो जाता है और वह डिसाइड करते हैं कि स्टीव वोजनियाक नए नए प्रोडक्ट को बनाने का आईडिया लाएंगे और स्टीव जॉब्स उन प्रोडक्ट की मार्केटिंग और पैकेजिंग करके बेचने में मदद करेंगे और इस तरह से एक ग्रेट पार्टनरशिप की शुरुआत होती है जो कि एक बड़ी कंपनी एप्पल के बनने की नींव बनी ।

Apple company की शुरुआत कैसे हुई ? (How Apple Inc. started)

साल 1976 को Apple company की स्थापना हुई, इस Company की शुरुआत 3 लोगों ने मिलके की थी, पहले थे Ron Wayne जो की एक electronic Workers थे और दूसरे थे Steve jobs और तीसरे थे steve Wozniak ।

1970’s के समय मे Computers इतने बड़े होते थे की वो एक Room मे भी नहीं समाते थे और उनको चलाने के लिए बहुत power की भी जरूरत पड़ती थी और जब वो computers चलते थे तो वो Room भी बहुत गरम हो जाता था ।

तो इन तीनों लोगों का इस company को बनाने का Goal यही था की वो एसे computers बनाने चाहते थे जो छोटा हो, light weight हो और उसे कोइ आम इंसान जिसे technology का ज्ञान नहीं भी हो वो भी उसका इस्तेमाल कर पाए ।

Apple Company का पहला Product Apple 1 था पर इसमे एक problem थी यह सिर्फ एक circuit Board थी। इसके साथ कोइ keyboard या screen नहीं आता था ।

Company शुरू होने के 12 दिन के अंदर ही Ron Wayne ने company के सारे shares steve jobs को $800 मे बेच कर चले गए क्यू की उनका Steve jobs के साथ मन मुटाओ हो गया था ।

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Apple 1 के थोरे बहुत sales के बाद, 1977 मे Market मे नया computer आया उसका नाम था Apple 2 था , यह Apple 1 से बेहतर था इसमे screen था, keyboard था और एक Floppy Drive भी था ।

1980’s तक IBM भी Computer market मे उतर चुका था जिससे apple के लिए और भी मुसकीले बढ़ गई ।फिर Apple ने Xerox company के साथ collaboration किया और उनसे उनका
Gui Technology लिया ।

फिर Apple ने market मे 2 नए computers launch किए वो थे, Apple 3 और Lisa, दोनों computers बहुत बुरी तरह fail हुए । फिर उसके बाद Apple ने दुनिया का सबसे Revolutionary computer launch किया ।

January 24 th 1984, Steve Jobs ने macintosh को Launch किया, public को वो पूरा presentation इतना अच्छा लगा की पूरे 1 minute तक public ने ताली बजाई । मैंने उस Event का video नीचे डाल रखा है आप देख सकते है ।

Steve jobs Macintosh को Launch करते हुए

Steve Jobs Promotional Product Launch Events

Iphone Launch Event 2007

Ipad Launch Event

Ipod Launch Event

IMac Launch Event 1998

एप्पल से बाहर निकाला जाना (Steve Jobs out of Apple)

1985 मे Steve jobs को John sculley जो की Apple के Board member थे उन्होंने बाहर निकलवा दिया । Apple के कुछ और employees के साथ steve jobs वहाँ से निकल पड़े ।

Next company की शुरुआत कैसे हुई ? ( How NEXT Inc. Started )

1985 मे steve jobs को apple से निकाले जाने के बाद, स्टीव ने एक नई company start की जिसका नाम था NEXT ।
असल मे paul berg नामक एक biochemistry professor ने स्टीव से एक special computer बनाने को कहा जो वो Stanford university मे use करना चाहते थे, higher education वाले student को पढ़ने के लिए ।

फिर स्टीव जॉब्स ने decide किया की Next company का पहला product यही होगा । और उन्होंने इसको बनाने की तैयारी शुरू कर दी और इसका official नाम Next computer रखा ।

Next computer को सिर्फ education market मे ही sell किया गया और इसका price उस टाइम पे $6,500 का था । पर 1990 के पास आते आते इस computer को बनाना बंद कर दिया गया क्यू की next नए model के computers launch करने वाला था ।

Next ने 2 नए work station computers launch किए, पहले का नाम था Next cube और दूसरे का नाम था Nextstation। यह दोनों computers पिछले model से fast और सस्ते थे और general public इसे Afford कर सकती थी ।

1993 तक next ने next station को बनाना बंद कर दिया, असल मे उस समय तक computer market मे बहुत सारे लोग आ चुके थे और किसी नई company का मुनाफा कमाना आसान नहीं था ।

फिर स्टीव जॉब्स ने notice किया की market मे उनके computers से ज्यादा उनके softwares और operating system की demand है ।

इसलिए steve jobs ने company को recreate किया और इसे software company मे तब्दील कर दिया । और इनका main product Nextstep operating system बना । company का नाम भी change कर के Next software रख दिया गया ।

Late 90’s तक सारे companies अपने employees को workstations देने लगे थे, पर उनको अपने industry के हिसाब से customized softwares का जरूरत था और उस जरूरत को पूरा Next softwares ने किया ।

स्टीव जॉब्स और पिक्सर movies का रिश्ता (Steve Jobs Pixar movies)

आप लोग George Lucas को जानते ही होंगे, अगर नहीं जानते तो बता दु George Lucas एक movie director है और वो अपने Sci-fi movies जैसे की Star Wars के लिए Famous है ।

तो George lucas के movies मे स्पेशल effects का बहुत use होता था इसके लिए उन्होंने एक Department Group बनाया था जिसका नाम था “ The Graphics Group” ।

ये 40 employees का एक group था जिसमे special effects के नए नए तरीकों का ईजाद किया जाता था ।
जब सारे movie projects पूरे हो गए तब George Lucas को इस Dapartment की जरूरत नहीं थी और उन्होंने इसे steve jobs को $10 Million मे बेच दिया ।

Steve jobs ने इसे इसलिए खरीदा क्यू की वो cgi का future देख सकते थे और उन्हे पता था की दूसरे companies भी इसमे interested होंगे ।

फिर उन्होंने उस पूरे department को एक company मे तब्दील कर दिया और उसका नाम pixar रखा । फिर pixar super advanced cgi computers develop करने लगी जिससे cgi और develop हो सके ।

पर धीरे धीरे steve jobs को समझ या गया की उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी है क्यू की इस company को run करने मे जितना पैसा लग रहा था उतना profit ये company नहीं बना पा रही थी ।

Pixar के co founder john lasseter ने steve jobs को suggest किया की उन्हे Cgi का use करके कंटेन्ट बनाना चाहिए जिससे कुछ तो profit बनेगा ।

फिर steve jobs की दिमाग की बत्ती जली और उन्होंने Disney के साथ 3 animated feature films का deal sign किया, यह पूरा deal $26 million का था ।

और इस तरह से pixar की पहली movie “Toy story” की बनने की शुरुआत हुई, इसके साथ ही steve jobs ने pixar का stock बेचने का भी decision लिया और ipo का launch date मूवी release के कुछ दिन के बाद का रखा ।

इस movie पर pixar और steve jobs का future टीका था क्यू की steve jobs के पास अब पैसे नहीं बचे थे इस company को fund करने के लिए ।

फिर एक चमत्कार हुआ opening weekend पर ही Toy story ने $30 million बनाए और Globally $365 Million बनाए ।

जैसे ही movie hit हुई pixar का stock price भी बढ़ गया, एक stock की price $39 per share तक चला गया और company की टोटल valuation $1.5 बिलियन हो गई।

स्टीव जॉब्स वापस Apple मे आए (Steve Jobs back at apple 1997)

1996 तक apple ने mac os का बहुत सारे updates निकाल दिए थे पर उसके बावजूद mac os बहुत पुराना और नए hardware के साथ compatible नहीं हो पा रहा था इसके बाद 1997 मे apple को मजबूरी मे Next को apple के साथ merge करना पड़ा ताकि वो steve jobs के nextstep os को mac os integrate कर पाए ।

इसके साथ ही steve jobs की apple मे as a consultant entry हुई इसके बाद steve jobs ने apple मे बहुत से changes किए और apple फिर से पटरी पर वापस या गई ।

उनके इतने बढ़िया काम को देखते हुए उन्हे interim ceo बना दिया गया और साल 2000 मे वो ceo भी बन गए । और इस तरह से steve jobs और next software ने apple को डूबने से बचा लिया ।

स्टीव जॉब्स को कौन कौन से Awards मिले है (Steve Jobs Awards, Honors and Achievements)

Awards

Honor

  •  1989 मे, Entrepreneur of the Decade by Inc. magazine मिला
  •  2004 से 2010 के बीच स्टीव जॉब्स, Time magazine मे 100 most influential people in the world के तौर पर include हुए
  •  2007 मे, fortune Magazine के द्वारा most powerful person in business की उपाधि दी गई
  •  2007 मे, California Hall of fame मे induct हुए
  •  2013 मे, Disney Legend के तौर पर induct हुए
  •  2017 मे, Apple park के अंदर Steve jobs theatre खुला

Achievements

  • Personal computer का Revolution लाना
  • Mouse और Graphical User Interface को Introduce करना
  • Portable music players जैसे की Ipod को general public के बीच introduce करना
  • I tunes का invention करके music sales को revolutionise कर देना
  • Computer Animation को नई उच्चाईयों तक ले जाना
  • Apple stores खोलना
  • Personal computers  को stylish बनाना
  • Smartphone market को Iphone से revolutionise कर दिया
  • Software  applications  के sharing और distribution को बदल के रख देना
  • Tablet trend को start करना 

स्टीव जॉब्स के बारे मे हैरत अंगेज़ Facts  (Lesser known facts about Steve Jobs)

• स्टीव जॉब्स अपने college के दिनों मे lsd का सेवन करते थे जो की एक drug है।
• स्टीव जॉब्स को hp मे इंटर्नशिप करने का मौका मिला था।
• जब स्टीव जॉब्स Atari गेमिंग company मे काम करते थे तब उन्हे night shift मे डाल दिया गया था क्यू की
नहाते नहीं नहीं और हर जगह नंगे पाओ घूमते थे ।
• उन्होंने Ipad के development को secret रखा था ।
• जब 1985 मे उनको Apple से निकाल दिया गया तब वो as a civilian Space मे जाने के लिए Apply किया पर उनका Application reject कर दिया गया ।
• उन्होंने एक बार soviet union मे भी Company start करने का सोचा था ।
• स्टीव जॉब्स के आखिरी शब्द कुछ एसे थे, “o wow…o wow… o wow…o wow…” स्टीव यह सब अपने Family Members के कंधों के तरफ देखते हुए बोल रहे थे ।
• Apple Lisa स्टीव जॉब्स के बड़ी बेटी Lisa के नाम पर रखा गया था ।
• जब स्टीव 1997 मे apple मे वापस लौटे तब से उन्होंने annual salary सिर्फ $1 लिया था ।
• स्टीव जॉब्स की Net Worth का 78% हिस्सा Apple के बजाए Disney से आता है ।
• Disney मे स्टीव जॉब्स 7 % के shareholder थे जो उन्हे Disney का single biggest shareholder बनाता है ।

स्टीव जॉब्स के प्रेरक विचार  (Steve Jobs Quotes in Hindi)

• “I want to put a ding in the universe.” [ मैं भ्रमाण्ड मे छाप छोरना चाहता हू ]
• “Innovation distinguishes between a leader and a follower.” [ Innovation ही Leader और Follower मे अंतर बताता है ]
• “Sometimes life is going to hit you in the head with a brick. Don’t lose faith.” [ कभी कभी life आपके सर पर इट फेक के मारेगी पर आपको धर्य नहीं खोना है ]
• “It’s better to be a pirate than to join the Navy.” [ Navy join से बेहतर है की डाकू बन जाओ ]
• “Design is not just what it looks like and feels like. Design is how it works.” [ Design सिर्फ देखने और महसूस करने की चीज नहीं है। Design का मतलब उसके काम करने से है । ]
• “Be a yardstick of quality. Some people aren’t used to an environment where excellence is expected.” [ Quality के मानक बनो। कुछ लोगों को एसे environment मे रहने की आदत नहीं जहाँ excellence Expect की जाती हो ]
• “The hardest thing when you think about focusing. You think focusing is about saying “Yes.” No. Focusing is about saying “No.” And when you say “No,” you piss off people.” [ ज्यादा लोगों को लगता है की Focus करने के लिए “Yes” बोलना पड़ता है। Focus करने के लिए “no” बोलना पड़ता है। जिससे बहुत सारे लोग नाराज भी होते है । ]
• “I’m as proud of what we don’t do as I am of what we do.” [ मुझे गर्व है उन चीजों पर जो मैं करता हु और उन चीजों पर भी जो मैं नहीं करता हु ]
• “It’s rare that you see an artist in his 30s or 40s able to really contribute something amazing.” [ ये बहुत कम देखा गया है की कोइ artist अपने 30’s या 40’s मे society के लिए कुछ बेहतर कर पाता है ]
• “Things don’t have to change the world to be important.” [जरूरी नई है की सिर्फ उन्ही चीजों को important समझा जाए जो दुनिया को बदल के रख देती है ]
• “You can’t connect the dots looking forward; you can only connect them looking backwards. So you have to trust that the dots will somehow connect in your future. You have to trust in something – your gut, destiny, life, karma, whatever. This approach has never let me down, and it has made all the difference in my life.” [ तुम Dots आगे देखते हुए नहीं connect कर सकते; तुम हमेशा dots पीछे देखते हुए ही connect कर सकते हो। इसलिए तुम्हें मान कर चलना होगा की तुम्हारे life का भी dots आखिर मे connect हो ही जाएगा। तुम्हें किसी भी चीज मे भरोसा करना होगा, जैसे की तुम्हारा अंतर्मन, किस्मत, ज़िंदगी, क्रम, कुछ भी। इसी Approach से मैंने ज़िंदगी जी है और इसने मुझे कभी निराश नहीं किया ।
• “Great things in business are never done by one person. They’re done by a team of people.” [ business मे महान चीज़े सिर्फ एक आदमी नहीं करता। पूरी Team इसके लिए जिम्मेदार होती है ]
• “Your time is limited, so don’t waste it living someone else’s life. Don’t be trapped by dogma – which is living with the results of other people’s thinking. Don’t let the noise of others’ opinions drown out your own inner voice. And most important, have the courage to follow your heart and intuition.” [ तुम्हारा समय Limited है इसलिए किसी और की ज़िंदगी मत जिओ। दूसरे लोगों की सोच के हिसाब से अपनी ज़िंदगी मत जिओ । दूसरों के Opinions से अपने अंदर की आवाज को मत दबने दो । और सबसे जरूरी बात, अपने अंतर्मन को follow करने का साहस रखो ।
• “Remembering that you are going to die is the best way I know to avoid the trap of thinking you have something to lose. You are already naked. There is no reason not to follow your heart.” [ ये याद करना की तुम एक दिन मर जाओगे, Best तरीका है Fear of lose को हटाने का। तुम Already नंगे हो। तो एसा कोइ कारण नहीं बचता जिसके वजह से तुम अपने दिल की न सुनो। ]
• “My favorite things in life don’t cost any money. It’s really clear that the most precious resource we all have is time.” [ मेरी Favourite चीजों का कोइ पैसा नहीं लगता । यह Clear है की समय से कीमती और कुछ भी नहीं । ]
• “For the past 33 years, I have looked in the mirror every morning and asked myself: ‘If today were the last day of my life, would I want to do what I am about to do today?’ And whenever the answer has been ‘No’ for too many days in a row, I know I need to change something. “[पीछले 33 सालों से, मैं अपने आप को हर सुबह mirror मे देखता हु और पूछता हु की ‘अगर आज मेरी ज़िंदगी का आखिरी दिन हो तो क्या आज जो मैं दिन भर करूंगा वो मैं कर रहा होता ?’ अगर जवाब लगातार ‘no’ आता था । तो मैं समझ जाता था की मेरी life मे कुछ चीज़े change करने की जरूरत है ]”
• “A lot of people in our industry haven’t had very diverse experiences. So they don’t have enough dots to connect, and they end up with very linear solutions without a broad perspective on the problem. The broader one’s understanding of the human experience, the better design we will have. “[हमारे industry के ज्यादातर लोगों ने कुछ अलग experience नहीं किया है। इसलिए उनके पास dots है ही नहीं जो वो connect कर पाए इसलिए वो बहुत सीधा सोचते है और problems को broader perpective से नहीं समझ पाते। जितना ज्यादा broad understanding होगा human experience का उतना ही अच्छा design हमारे products का होगा । ]”
• “An iPod, a phone, an internet mobile communicator… these are NOT three separate devices! And we are calling it iPhone! Today Apple is going to reinvent the phone. And here it is. [iPod, phone, और internet mobile communicator यह सब अलग अलग devices नहीं है यह सब इस Iphone के अंदर है। आज से Iphone phone को reinvent कर देगा ।
• “Remembering that I’ll be dead soon is the most important tool I’ve ever encountered to help me make the big choices in life. Because almost everything – all external expectations, all pride, all fear of embarrassment or failure – these things just fall away in the face of death, leaving only what is truly important.” [ ये याद करना की मैं जल्द ही मर जाऊंगा, मेरे लिए बहुत बड़ा औज़ार बना है जिससे मुझे बड़े Decision लेने मे मदद मिलती है। क्यू की लगभग हर चीज – Expectations, pride, Failure या बेइज्जत होने का डर, मौत के सामने नहीं ठहरते । और रह जाती है वो चीज़े जो जरूरी है ]
• “I didn’t see it then, but it turned out that getting fired from Apple was the best thing that could have ever happened to me. The heaviness of being successful was replaced by the lightness of being a beginner again, less sure about everything. It freed me to enter one of the most creative periods of my life.” [ मैंने इसे पहले नहीं देखा, पर Apple से निकाला जाना मेरे लिए बेहतर ही था क्यू की success के भार की जगह अब मुझे beginner होने का हल्कापण महसूस हो रहा था और इस situation ने मुझे आजाद कर दिया, और इस तरह से मैं अपने career के सबसे creative period मे enter हुआ ।]

स्टीव जॉब्स की personal Life, Girlfriend, Wife and kids

Relation With Real Parents

जब तक steve jobs की Adoptive माँ जिंदा थी तब तक के लिए steve jobs ने अपने real parents की खोज start नहीं की थी, फिर 1986 मे उनकी Adoptive माँ clara को lung cancer हो गया, उसके बाद स्टीव ने अपने पिता जी से इजाजत लेके अपने real parents की खोज start की ।

जिस doctor ने steve jobs की माँ की delivery करवाई थी उसने मरने से पहले एक letter छोरा था जिसमे स्टीव के रियल parents के सारे details थे।

फिर स्टीव ने अपनी असली माँ का Address पता किया और वो उनसे मिलने गए, उनकी माँ उनसे मिलने के बाद रोने लगी और फिर स्टीव से माफी भी मांगी, steve और उनकी माँ friends बन गए और स्टीव हर christmas पर उनसे मिलने भी जाते थे । उनकी असली माँ का नाम Joanne Schieble Simpson था ।

उनकी असली माँ की एक बेटी भी जिसका नाम Mona Simpson है और इस तरह से स्टीव को एक बहन भी मिल गई, दोनों की बहुत अच्छी बनने लगती है और स्टीव के आखिरी time तक स्टीव और mona साथ रहते है ।

स्टीव अपने पिता से कभी नहीं मिलते क्यू की एक तो उनके पिता उनकी माँ को चोर कर Syria वापस चले गए थे और दूसरा कारण यह था की उस समय तक स्टीव बहुत आमिर बन चुके थे so उन्हे डर था की उनके पिता उन्हे blackmail कर के उनसे पैसे एठने का try करेंगे ।

Steve jobs Girlfriend, Wife and kids

1978, जब स्टीव 23 साल के थे तब उनकी girlfriend Chrisann Brennan ने एक लड़की को जन्म दिया, पर स्टीव ने उसे अपनी बेटी मानने से इनकार कर दिया और court मे कहा की वो sterile है इसलिए वह उनकी बेटी हो ही नहीं सकती।

फिर जब स्टीव जॉब्स को 1987 मे Apple से निकाला गया तब उनमे बहुत से changes आए फिर स्टीव ने Chrisann Brennan से माफी मांगी और अपनी बेटी को भी अपनाया, उन्होंने अपनी बेटी का नाम Lisa Brennan jobs रखा

Tina Redse, स्टीव जॉब्स की second long time Girlfriend थी और स्टीव ने उससे शादी करने के लिए 1989 मे propose भी किया था पर उसने स्टीव को यह बोल के मन कर दिया की “ उसे पागल नहीं होना है”।

फिर just कुछ सप्तों के बाद ही वो एक नई लड़की से मिले जब वो Stanford मे भासन देने गए थे। और स्टीव ने अपनी बहन मोना से कहा था की वो इसी लड़की से शादी करेंगे।

उस लड़की का नाम Laurene Powell था फिर March 18, 1991 को स्टीव ने laurene से शादी कर ली ।

Laurene से शादी के बाद स्टीव के 3 बच्चे हुए, जिसमे से 1 beta था और 2 बेटियाँ ।

बेटे के नाम reed था. मँझली बेटी क नाम erin था और सबसे छोटी बेटी का नाम eve था ।

स्टीव को अपने बेटे Reed से बहुत लगाओ था, मँझली बेटी चुप चाप  रहती थी और स्टीव भी उसपे उतना ध्यान नहीं देते थे, पर उनकी सबसे छोटी बेटी eve की will power बहुत high था इस वजह से स्टीव भी उसमे interested थे।

स्टीव जॉब्स की मौत कैसे हुई ? (Steve Jobs Death)

October 2003 मे jobs pancreatic cancer से diagnosed हुए, ये cancer बाकी cancers के मुकाबले ज्यादा जानलेवा नहीं था और स्टीव ठीक हो सकते थे।

पर जैसा की आप अभी तक समझ ही गए होंगे की स्टीव बहुत ही जिद्दी इंसान थे उन्होंने doctors की एक नहीं सुनी और Alternative Medicines के तरफ रुख कर लिया, उन्होंने बहुत कुछ Try किया जैसे की Herbal Treatments, Acupuncture, Homeopathic medicines यहाँ तक उन्होंने psychic से भी consult किया था।

ये सब करने के चक्कर मे 9 महीने बीत गए और उनकी हालत बद से बत्तर होती गई। बहुत सारे medical proffesionals का यह कहना है की steve का इतनी जल्दी मरने के कारण उनकी लापरवाही और जिद्द थी ।

फिर july 2004 को उन्होंने आखिरकार अपना सर्जरी करवाया और उनके tumor को निकाल दिया गया । लेकिन january 2006 तक वो cancer फिर से वापस या गया और steve की हालत फिर से खराब होने लगी, जैसा की आपने notice किया होगा 2006 के बाद स्टीव जॉब्स का weight बहुत कम हो गया था और 2010 तक तो वो सुख के काटा हो गए थे।

April 2009 मे स्टीव jobs का liver transplant भी हुआ। और सब को लगने लगा था की सब कुछ ठीक हो गया है ।
फिर August 24, 2011 को स्टीव ने ceo के पद से Resign कर दिया और उन्होंने chairman of the board का पद संभाला। Tim cook Apple के नए Ceo बने।

October 5, 2011, दोपहर 3 बजे के करीब steve jobs की मौत हो जाती है । स्टीव की बहन मोना बताती है की steve अपने bed पर लेटे हुए थे और उनकी बीवी और बच्चे पास ही थे, फिर उन्होंने सारे कारीबीओ को एक आखिरी बार देखा और फिर एक टक सभी के कंधों की तरफ देखते रहे और एक word को 3 बार repeat किया “ o wow o wow o wow”। उसके बाद वो बेहोश हो गए और कुछ घंटों के बाद उनकी मौत हो गई ।

आखिर मे मैं बस यही कहूँगा की Steve Jobs Motivational Story in Hindi बहुत सारे youngsters के दिल मे जोश भर देती है, बहुत सारे नए Entreprenuers steve jobs से ही Inspire हुए है।

FAQ

स्टीव जॉब्स ने जब एप्पल कंपनी की शुरुआत की थी तब उनकी उम्र कितनी थी? [ Steve Jobs Age when He started Apple Inc. ]

स्टीव जॉब्स ने Apple की स्थापना 1976 मे की थी और उस समय वो बस 21 साल के थे ।

स्टीव जॉब्स के आखिरी शब्द क्या थे ? [ what was Steve jobs’s Last Words ]

स्टीव जॉब्स जब अपनी आखिरी सांस ले रहे थे तब उनके आखिरी शब्द थे “0 wow, o wow, o wow”

स्टीव जॉब्स का आईक्यू कितना था ? [ What was Steve jobs’s IQ ]

Steve Jobs का IQ 160 था ।

स्टीव जॉब्स की मौत किस उम्र मे हुई ? [ what was steve jobs age at death? ]

स्टीव जॉब्स की Death October 5, 2011 को हुई थी और उस समय उनकी age 56 की साल की थी ।

स्टीव जॉब्स किस प्रकार की कार से चलते थे ? [ which Car Brand was used by steve Jobs ? ]

स्टीव जॉब्स ने अपनी पूरी ज़िंदगी मे अगर किसी Car को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया है तो वो है Mercedes-Benz SL55 AMG

जब स्टीव जॉब्स की Death हुई तब उनकी Net Worth कितनी थी ? [ What Was steve jobs net worth when he died? ]

स्टीव जॉब्स के Death के समय उनकी Net Worth करीबन $10.2 billion की थी ।

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