Blind लोगो के लिए बना दी 50 करोड़ की कंपनी|srikanth bolla success story in hindi

नमस्कार दोस्तो आज हम जिसके बारे मे जानने वाले है, जिनके बारे मे पढ़ने वाले हैं उन्होने srikanth bolla success story in hindi अपनी शारिरीक कमजोरी को आपनी किस्मत नहीं बनने दी। उन्होने अपने जज्बे और जिद के साथ जीवन मे वो सफलता हाशिल की जो समाज ने कभी सोचा नही था की वो व्यक्ति ऐसा कुछ कर पायेगा । मैं जिसकी बात कर रहा हूं उनका नाम है श्रीकांत बोला (srikanth bolla) . श्रीकांत बोला bollant industries pvt ltd. के ceo हैं।

srikanth bolla success story in hindi की शूरुआत

नेत्रहीन होने के वावजूद भी श्रीकांत ने bollant industries की शुरुआत की, और इस कंपनी को सफलता को उचाईयों तक पहूंचाया। आज bollant industries pvt ltd. की मर्केट वेल्यू 50 करोड़ की हैं।

इस कंपनी के जरिये श्रीकांत बोला ने कई दिव्यांगो की मदद की उन्हे अपनी कंपनी मे जॉब दिया और अपने साथ मिल कर काम करने का मौका दिया। जिसकी वजह से बहुत सारे दिव्यंगो ने अपने जीवन को सफल बनाया।

श्रीकांत बोला का जन्म आन्ध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव सीतारामपुरम मे हुआ था। श्रीकांत नेत्रहीन पैदा हुए थे। वह जन्म से ही नेत्रहीन थे।

जब श्रीकांत का जन्म हुआ उनके माता पिता बहुत उदास थे, क्युंकि श्रीकांत नेत्रहीन पैदा हुए थे।

नेत्रहीन होने के कारन गांव वालो ने श्रीकांत के माता पिता से यह तक कह दिया था की यह बच्चा किसी काम का नही है इसे मार दो, वरना यह आगे चल कर परिवार पर बोझ बन जाएगा।

लेकिन श्रीकांत के माता पिता ने समाज की एक ना सुनी और अपने बच्चे को एक आम बच्चे जैसा पालन पोशन किया।

श्रीकांत जब 7-8 साल के हुए उनके पिता उन्हे अपने साथ खेत मे ले जाने लगे ताकी उनकी कुछ मदद हो पाये।

लेकिन नेत्रहीन होने के कारन वह कुछ भी मदद नही कर पाते थे। इसलिए उनके पिता ने सोचा की श्रीकांत को स्कूल भेजा जाये ताकी वह पढ़ाई कर सके।

श्रीकांत के घर से 5 किलोमीटर दूर एक स्कूल था जहां उनके पिता ने श्रीकांत का दाखिला करा दिया। श्रीकांत स्कूल जाने लगे लेकिन वह स्कूल मे बहुत अकेला महसूर करते थे।

क्युंकि वह बाकी बच्चो की तरह नही थे उन्हे क्लास की सबसे पिछली बैंच पर बैठाया जाता था।

जब पिटी का पीरियड आता था तब सभी बच्चे खेलने चले जाते थे और श्रीकांत उनके साथ नही खेल पाते थे बाकी बच्चे उन्हे कहते थे तुम भाग दौड़ वाले खेल नही खेल पायोगे।

श्रीकांत कहते हैं जब मै स्कूल मे था तब सोचता था दुनिया का सबसे लाचार बच्चा मै ही हूं, जो खुद कुछ नही कर सकता।

श्रीकांत की मौजूदगी स्कूल मे ना के बराबर थी वह स्कूल मे बहुत अकेला महसूस करते थे।

श्रीकांत के पिता समझ गये की उनका बेटा इस स्कूल मे अच्छा नही कर पा रहा। तभी उन्होने श्रीकांत का दाखिला हैदराबाद के एक दिव्यांग स्कूल (special school) मे कर दिया।

कुछ ही महिनो मे श्रीकांत इस स्कूल मे अच्छा करने लगे। इसी स्कूल मे रहते हुए उन्होने चेस और क्रिकेट जैसे खेल खेलना शुरु किया ।

श्रीकांत क्रिकेट मे अपने देश को represent भी किया उन्होने national level पर भी क्रिकेट खेला। कक्षा मे वह प्रथम भी आने लगे।

उनके अच्छे परफोर्मेंस के कारन dr Apj Abdul kalam के साथ lead india project पर काम करने का मौका मिला।

श्रीकांत ने 10वी की परीक्षा आँध्र प्रदेश स्टेट बोर्ड से 90 % अंकों से पास की थी। इसके बाद भी उन्हे 11वी मे साइंस नही लेने दिया जा रहा था।

बोर्ड का कहना था की नेत्रहीन बच्चे साइंस नही ले सकते। लेकिन श्रीकांत ने इस निर्णय का विरोध किया और 6 महीने तक अकेले सरकार से लड़ते रहे।

आखिर कार 6 महीने बाद सरकार ने उन्हे साइंस लेने की मजूरी दे दी।

इसके बाद श्रीकांत ने पूरी मेहनत की और 12वी 98% के साथ पास किया।

 12 वी पास होने के बाद श्रीकांत ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये भारत के सभी iit कॉलेजों मे उन्होने entrance परीक्षा का फॉर्म भरा लेकिन उनके दृष्टिहीन होने के कारन उन्हे भारत के सभी इंजीनियरिंग कॉलेज ने ऐडमिशन देने से मना कर दिया।

अमेरिका के mit मे admission

श्रीकांत थोड़े निराश हुए लेकिन उन्होने हार नही मानी और इंटरनेट के माध्यम से उन्होने अमेरिका के कुछ ऐसे कॉलेजों को ढूंढ निकाला जो नेत्रहीन व्यक्ति को भी इंजीनियरिंग करने का मौका देती है।

फिर क्या था उन्होने अमेरिका के कॉलेजों मे अप्लाई कर दिया, चार कॉलेजों ने श्रीकांत की ऐप्लिकेशन को स्वीकार कर लिया।

जिसमे से श्रीकांत ने MIT (Massachusetts Institute of Technology) को चुना और अपनी आगे की पढ़ाई के लिये वह अमेरिका चले गये। इसके साथ ही वह mit के पहले नेत्रहीन छात्र बने।

दिव्यांगो और शरिरिक रुप से कमजोर लोगो की मदद

श्रीकांत की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हे लाखो की नौकरी अमेरिका मे मिल रही थी। लेकिन उन्होने नौकरी छोड़ भारत आने का फैसला किया और वह भारत लौट आये।

भारत आने के बाद उन्होने शारिरीक रुप से कमजोर लोगो की मदद करने, उन्हे प्रोत्शाहीत करने का काम शुरु किया।

जिसका मकसद यह था की वो लोग भी समाज मे अच्छे से जीवन जी पाये उन्हे भी वह सम्मान मिले जो एक आम इंसान को मिलती है और उन्हे अलग ना समझा जाये।

श्रीकांत ने 3000 से भी ज्यादा लोगो की मदद की लेकिन उन्हे यह महसूस हुआ की यह लोग समान्य जीवन तो जीने लगे हैं परंतु यह अपने रोजाना की जरूरत के लिये किस पर आश्रित रहेंगे।

bollant industries pvt ltd की शुरुआत

श्रीकांत बोला ने दिव्यांगो और शारिरीक रुप से कमजोर लोगो की मदद करने के लिये bollant industries pvt ltd की शुरुआत की ताकी वह लोग यहां काम कर पाये और अपनी रोजाना की जरुरत को पुरा कर सके। वह अपनी जरूरतों के लिये किसी और पर आश्रित ना रहे।

bollant industries pvt ltd मे आज 200 से ज्यादा दिव्यंग काम कर रहे हैं और अपनी जिन्दगी खुशहाल तरीके से जी रहे हैं।

श्रीकांत ने अपनी सफलता से उन सभी लोगो को झूठा साबित कर दिया जो उन्हे कहते थे की वह जीवन मे कुछ नही कर पायेंगे।

श्रीकांत ना केवल खुद सफल हुए बल्कि बहुत सारे दिव्यांगो को भी जीवन जीने का एक तरीका सिखाया।

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको srikanth bolla success story in hindi की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।

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