Somnath Mandir की स्थापना कैसे हूई|Hindi kahaniya|Shiv puran

Somnath Mandir की स्थापना कैसे हूई 


Somnath Mandir की स्थापना कैसे हूई का संक्षिप्त विवरण|Hindi kahaniya|hindi kahani|moral stories in hindi

शिव पुराण के अनुसार सोमनाथ मंदिर की स्थापना कैसे हूई । आइये देखे [Hindi kahaniya]

भगवान ब्रम्हा के पुत्र दक्ष जो की रजायों के देवता थे । उनकी दो पत्निया थी प्रसूती और असिकी । राजा दक्ष की प्रसूति से 16 पुत्रियां का जन्म हुआ । वहीं असिकी से साठ पुत्रियां का जन्म हुआ । प्रसूति से जन्मी 16 पुत्रियों का विवाह धर्म से हुआ । 16 पुत्रियों मे से एक सती भी थी । जिनको आधी शक्ति भी कहा जाता है । जिनका विवाह महादेव शिव के साथ हुआ था ।

असिकी से जन्मे 60 पुत्रियों मे से बहुत से पुत्रियों को राजा दक्ष ने जनसंख्या मे वृधि होने के लिये दान मे दे दिया। दस पुत्रियों का विवाह धर्मराज के साथ हुआ। 17 पुत्रियों मुनी कश्यप को दि गई। 27 पुत्रियों की चंद्र के देव चंद्रमा से विवाह हुआ । बाकी 6 पुत्रियों मे से 2 भूत को दि गई । 2 ऋषि अंगीरा को और 2 पुत्री को कृशाशव को दि गई। [Hindi kahaniya]

चन्द्रमा को शह होने का श्राप कैसे पड़ा?

चंद्रमा की 27 पत्नी थी । उन 27 पत्नियों मे चन्द्रमा सबसे अधिक प्रेम रोहिणी से करते थे। बाकी दूसरी पत्नियों को चंद्रमा अधिक समय नही देते थे। इसे बाकी पत्निया दुखी रहने लगी और वो सभी राजा दक्ष के पास गई। और उन्हे अपनी वयथा सुनाई।

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 राजा दक्ष से उनकी समस्या सुनी और चन्द्रमा को बुलाया और समझाया की वो अपनी सभी पत्नियों को समान अधिकार और प्रेम दे। चंद्रमा ने उनकी बात सुन ली लेकिन उन्होने ने उसका पालन नही किया । बार बार चंद्रमा के ऐसा व्यवाहर  से राजा दक्ष क्रोधित हो गये और उन्होने चन्द्रमा को शह होने का श्राप दे दिया। [Hindi kahani]

दक्ष के श्राप के कारन चंद्रमा दिन प्रतिदिन शह होने लगे । ये देख कर सभी देवताओ ने मिलकर दक्ष के द्वारा दिये गये श्राप से मुक्ति की कामना करते हुए। ब्रम्हा के पास गये । ब्रम्हा ने कहा मै दक्ष का दिया श्राप वापस नही ले सकता। लेकिन इस श्राप से मुक्त होने का रस्ता बता सकता हूं।

चंद्रमा की जान किसने बचाई?

ब्रम्हा ने चंद्र प्रहस क्षेत्र मे जाये और शिवलिंग की प्रतिष्ठा कर महा मृतुनंजय का जाप कर तपस्या करे । चंद्रमा ने 2 करोड़ बार महा मृतंजय मंत्र का जाप किया। चंद्रमा की तपस्या से महादेव परसन हुए और उन्हे दरशन दिया । चन्द्रमा ने महादेव के प्रकट होने पर कहा । महादेव मुझे इस श्राप से मुक्त कर दिजीये मै दिन प्रतिदिन शह होते जा रहा हूं। मेरे शह हो जाने से संसार को मै रोशनी नही दे पा रहा। मुझे इस श्राप से मुक्ति दिजीये और संसार का कल्यान करे। [Moral stories in hindi]


तभी महादेव ने कहा मै तुम्हे इस श्राप से मुक्त नही कर सकता परंतु मै तुम्हे अपने शिश पे धरण करूंगा जिसे तुम्हारी 15 दिन तक रौशनी धीरे धीरे घटती जायेगी परंतु पनाह 15 दिन तुम्हारी रौशनी बढती जायेगी और तुम सामान्य हो जयोगे । यह प्रक्रिया अनंत काल तक चलेगी ।  इस प्रकार महादेव ने चन्द्रमा को शह होने के श्राप से मुक्त किया ।

शिवरात्रि की शुरुआत कैसे हूई?

इस दिन को हम शिवरात्रि के नाम से जनते हैं। इसी दिन जो पुरूष शिवरात्रि का व्रथ रखता है। उस पुरूष की सभी कामना परी होती है। जो कुँवारी  लड़कियाँ इस दिन उपवास रखती हैं उन्हे मन चाहा वर मिलता है। जो विवाहित स्त्री इस वृथ को करती हैं उन्हे सदा सुहागन होने का आशिर्बाद मिलता है  [Hindi kahaniya] 


उसे भगवान शिव से वरदान प्राप्त था कि भगवान शिव के पुत्र के अलावा अन्य कोई उसे मार नहीं सकेगा।

चंद्रमा ने जिस जगह महादेव की शिवलिंग स्तापिथ कर तप किया था। वहा आज एक बहुत बडा मंदिर है। जिसे हम सोमनाथ मंदिर के नाम से जानते हैं। जो की गुजरात के अहमदाबाद मे है। ऐसा माना जाता है की आज भी महादेव उस मंदिर की शिवलिंग मे वाश करते हैं।
आज भी लोग दूर दूर से यहाँ पूजा करने शिव जी की दरशन करने आते हैं।

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निष्कर्ष 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको somnath mandir की स्थापना कैसे हूई|Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi| Shiv puran की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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