एक भिखारी बच्चा जिसने खडी कर दी 50 करोड़ की कंपनी|Renuka aradhya biography in hindi

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Renuka aradhya biography in hindi की सुरुआत

रेणुका अराधय का जन्म गोपसन्द्र गांव मे हुआ था। यह एक छोटा सा गांव है जो बंगलोर मे है। रेणुका के पिता एक मंदिर मे पुजारी थे।
 
 उनके कोई फिक्स कमाई नही थी। पूजा के बाद रेणुका अपने पिता के साथ गांव मे घूम घूम कर भिक्षा मांगते थे।
 

उन्हें जो भी अनाज मिलता वह बाज़ार मे बेच देते थे। इसी तरह उनका और उनके परिवार का जीवन चलता था। 

12 साल की उम्र मे रेणुका के पिता ने उन्हें काम पर रखवा दिया। जहां वह घर के काम करते थे। जैसे झाडू पोछा, बर्तन धोना इत्यादि ।

रेणुका के एक भाई और एक बहन थे जो बंगलूर मे रह कर पढ़ाई करते थे। रेणुका जब 10वी कक्षा मे थे तब उनके पिता का देहांत हो गया।

जिसके बाद घर की सारी जिमेदारी रेणुका पे आ गई। परिवार मे उनकी मां और उनकी बहन थी। 

रेनुका के बड़े भाई ने शादी कर ली थी और उसने परिवार की जिम्मेदारी उठाने से मना दिया था। जिसके कारन रेणुका को अपनी पढ़ाई छोड़ काम करना शुरु करना पड़ा।

उन्होने कई तरह के काम किया। वह एक प्लास्टिक बनाने वाली कंपनी मे मजदूरी करते थे। उसके बाद उन्होने बर्फ बनाने वाली कंपनी मे भी काम किया। रात मे गार्ड का भी काम किया करते थे।

बाद मे उन्हे एक प्रिंटिंग सेन्टर मे स्वीपर का काम मिला। अपने काम से और अपने व्यवहार से वह वहां काम करने वाले लोगो का दिल जीत लिया था। वह फोटो कॉपी मे भी मदद किया करते थे।

रेणुका आराधय को अपना बिज़नेस करने का आइडिया तब आया जब उन्होने स्वीपर का काम छोड़। शयाम सुन्दर ट्रेडिंग कंपनी मे बतौर हेल्पर के रुप मे शामिल हुये। 

वह शयाम सुन्दर ट्रेडिंग कंपनी मे मजदूरी करते थे। उनका काम समान को फैक्ट्री से ट्रक मे लोड करना और आस पास के दुकानो मे पहुचाना था जहां कमी होती थी।

1987 मे उनका promotion हुआ और उनको कंपनी का सेल्समैन बना दिया गया। रेणुका आराधय का कहना है की बतौर सेल्समैन वह बाज़ार को समझने लगे थे। उन्होने सिखना चालू किया सेल्स मार्जिन,वेंडोर,रीटेलर और खरीदार के बारे मे।

जब उनको सभी चीज़ो का पता चल गया तब उन्होने अपना बिज़नेस शुरु करने का सोचा।

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 वह घर पर suitcase और vanity बैग के कवर सिलते थे और साइकिल से बाज़ार मे बेचते थे। लेकिन यह काम चल नही पाया और उनको यह बंद करना पड़ा। 

Renuka aradhya की wife कौन थी?

20 वर्ष की उम्र मे उन्होने शादी की उनकी पत्नी का नाम पुष्पा था। शादी के बाद रेणुका की पत्नी भी एक गार्मेंट फैक्ट्री मे काम करने लगी ताकी अपने परिवार को चला पाये।

 दोनो साथ मिलकर 600 कमा लेते थे। रेणुका साइड से माली और नारियल के पेड़ पर चढ़ने का भी काम करते थे। उन्हे प्रती पेड़ पर चढ़ने के 20 रूपय और कटाई छटाई के 15 रूपय एक पेड़ के मिलते थे।

जब वह गार्ड का काम करते थे तब उनकी मुलाकात अलग अलग ड्राईवर से होती रहती थी। उन्होने ड्राईवर का काम शुरु करने का सोच लिया। वह कुछ पैसे उधार लेकर और अपने शादी की अंगूठी को गिरवी रख उन्होने driving licence लिया।

जब वह बतौर ड्राईवर काम पर गये उन्होने पहले दिन ही गाड़ी थोक दी। तब उनके जिन्दगी मे सतीश रेड्डी आये। सतीश एक टैक्सी ओपरेटर का काम करते थे।

 वह रेणुका को अपने साथ घर ले जाते हैं है उनको गाड़ी चलाना सिखाते हैं। पहले तीन दिन वह आस पास के इलाको मे ही गाड़ी चलाते हैं। 

बाद मे सतीश ने रेनुका को कहा की तुम सवारी ले कर गोकरना जाओ। उन्होने ऐसा ही किया यह एक लम्बा ट्रिप था। इसके वाद रेणुका को आत्मविश्वाश मिला। वह सतीश के साथ 2 सालो तक काम करते रहे।

आगे चल कर वह एक ट्रांसपोर्ट real life inspirational stories of success in hindi कंपनी मे शामिल हुए। वह डेड बॉडी (लाशों) को हॉस्पिटल से घर तक पहूंचाने का काम करते थे। रेनुका इस ट्रांसपोर्ट कंपनी मे चार साल तक काम करते रहे। उन्होने लगभग 300 लाशो को ट्रांसपोर्ट किया।

अब तक रेणुका को अपने जीवन का लक्ष्य मिल चुका था। उनका लक्ष्य था खुद का एक ट्रैवल कंपनी चालू कारना।

वह कहते है जब मै ड्राईवर था तब ट्रिप के अंत मे सभी ड्राईवरो को एक शीट एजेन्सी को जमा करना पड़ता था। एक दिन जब वह शीट जमा करने गये तब उन्हे ऑफ़िस के बाहर बैठने को बोला गया और कहा गया की सिक्योरिटी गार्ड को अपना शीट दे दो।

यह बात रेनुका को बहुत बुरी लगी। तभी उन्होने ठान लिया की अब अपनी कंपनी चालू करना पडेगा जहां ड्राईवर सीधा ऑफ़िस मे आके खुद शीट जमा कर सकते हैं।
उन्हे भी इज्जत मिलेगी।

2000 मे उन्होंंंने अपनी पहली कार ली। इसके लिये उन्होने 1.5 लाख का लोन लिया और अपने पत्नी के पी एफ के पैसे और खुद के कुछ बचाए हुए पैसे जो उन्हे टिप के तौर पर मिलता था सभी को मिला कर उन्होने अपनी पहली कार ली। वह कार थी indica

अगले कुछ सालो मे रेनुका ने उस कार से खुब कमाई किया और 6 और गाड़ियाँ ले ली। रेणुका ने 12 ड्राईवर को भी नौकरी दी। सभी की 12 घंटे की शिफ्ट होती थी।

2006 मे उन्हे पता चला की indian city taxi जो की एक मशूर कंपनी थी वह बिक रही थी। रेणुका ने उस कंपनी को खरीदने के लिए अपनी सारी गाडिय़ों को बेच दिया। उस कंपनी के साथ 30 गाड़ियाँ जुडी थी और वह 80,000 हर महीने कमा रही थी।

pravashi cabs की शुरुआत|Renuka Aradhya biography in hindi

बाद मे रेनुका ने सभी गाड़ियों को pravashi cabs के अंडर register किया। 2007 मे उनका पहला client बना amazon india उस समय amazon अपने ऑफ़िस चेनई मे स्थापित कर रहे थे। तब उन्हे employees को pick up and drop का काम मिला।

बाद मे उन्हे और भी बड़ी बड़ी कंपनीयो से काम मिलने लगे। वह भी बिना कोई परचार (advertisement ) के धीरे dheere यह कंपनी चेनई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों मे फैल gayi। 2018 तक pravashi cabs के पास 1300 + गाड़ियाँ ho gayi।

ola और uber जैसी बड़ी कंपनीयो के आने के बाद भी उनके बिज़नेस पर कौ ज्यादा फर्क नही पड़ा है। आज उनकी कंपनी की सालाना कमाई 38 करोड़ रूपय है।

Owner cum Driver scheme

रेणुका जी ने एक owner cum driver नाम से एक scheme भी शुरु किया है। जिसमे किसी ड्राईवर को खुद की गाड़ी चाहिये तो वह ले सकता है। 

उसे 50,000 ऐडवांस देना होता है और रेणुका जी नई कार खरीदते हैं और ड्राईवर को 36 महीने Hindi kahania तक उनके साथ काम करना पड़ता है जिसमे वह हर महीने गाड़ी की emi ड्राईवर के सैलरी से काट लेते है। 

जब गाड़ी की पूरी emi खत्म हो जाती है तब गाड़ी उस ड्राईवर के नाम पे कर दी जाती है। उसके बाद वह उनके साथ काम करना चाहे तो कर सकता है या फिर वह कही बाहर भी काम कर सकता उस पर कोई पाबंधी नही होती।

रेणुका आराध्य कहते है की ” जीवन मे कभी हार नही मानो। बड़े सपने देखो,रिस्क लो और सिखना कभी मत छोडो। हमेशा खुद से इमानदार रहो। 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको एक भिखारी बच्चा जिसने खडी कर दी 50 करोड़ की कंपनी|Renuka aradhya biography in hindi की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
 
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