ज़िन्दगी के race में कौन जीतता है|motivation story for student in hindi

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Motivation story for student in hindi की शूरुआत

एक समय की बात है किसी गांव में एक युवा लड़का था। वह लड़का एक athlete था जो सफलता का भूखा था।

उसके लिये जीत ही सबकुछ था, वह सफलता को जीत से मापा करता था।

एक दिन वह लड़का एक दौड़ के competition के लिये खुद को तैयार कर रहा था। यह रेस उसके गांव मे ही हो रहा था। उस लड़के के साथ दो और लड़के थे जो उस रेस मे भाग ले रहे थे।

एक बूढ़ा आदमी बेच पर बैठा था और सुन रहा था,लड़का बोल रहा था मैने बहुत मेहनत की है मुझे जीतना ही है।

कुछ देर बाद रेस शुरु हुई। लड़का अपनी पूरी जान लगा कर भागा और 1st आया। उसने रेस जीत लिया था।

लड़का अपने हाथ को हवा मे उठा कर लहराते हुए वहां खड़े भीड को धन्यवाद कर रहा था।

भीड भी लड़के के लिये जोर जोर से तालियाँ बजा रही थी। लड़का बहुत महत्वपूर्ण महसूस कर रहा था।

एक रेस खत्म हुआ थोड़ी देर बाद 2 नये लड़के आये जो इस लड़के के साथ दौड़ने वाले थे। एक बार फिर रेस शुरु हुआ,इस बार भी वह लड़का जीत गया।

भीड ने तालियों से उसको सम्मान दिया। वहां बैठा बुढ़ा आदमी यह सब देख रहा था। लड़का बहुत खुश था।

बूढ़े ने लड़की से क्या कहा ?

तभी बुढ़ा आदमी उस लड़के के पास आता है और एक बार फिर रेस करने को कहता है। लेकिन इस बार जो रेस मे दो और दौड़ रहे थे वह एक नेत्रहीन महिला था और दुसरा एक बुजुर्ग व्यक्ति था।

रेस शुरु हुआ और लड़का रेस मे भागा और जीत गया। बाकी दो लोग ने रेस भागा ही नही वह ट्रैक पर खड़े रह गये। लेकिन इस बार भीड ने ना तो लड़के के लिये ताली बजाई और ना ही उसको सम्मान दिया।

लड़का निराश हो गया। वह उस बूढ़े व्यक्ति के पास जाता है और पूछता है क्या हुआ? लोग मेरी जीत मे शामिल क्यू नही हुए।

बुढ़ा व्यक्ति कहता है। एक बार फिर रेस करो लेकिन इस बार तुम तीनो साथ रेस खत्म करना। लड़के ने थोड़ी देर के लिये सोचा और कहा ठीक है।

लड़का नेत्रहीन महिला और बुजुर्ग व्यक्ति के बिच मे खड़ा हो गया और दोनो का हाथ पकड़ लिया।

रेस शुरु हुआ और लड़का धीरे धीरे चल रहा था बाकी दोनो लोग भी साथ चल रहे थे। रेस खत्म हुआ तीनो ने साथ रेस खत्म किया था।

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वहां खडी भीड लड़के के लिये चिला रही थी। वह सभी लोग लड़के को बहुत सम्मान दे रहे थे। यह देख लड़का बहुत खुश था वह फिर महत्वपूर्ण महसूस करने लगा। बूढ़ा आदमी भी खुश था।

लड़का बूढ़े व्यक्ति के पास जाता है और कहता है भीड किसके लिये उत्साहित है? हम तीनो मे से किसने रेस जीता? बूढ़ा आदमी मुस्कराकर लड़के के कंधे पर हाथ रखता है और कहता है।

बच्चे तुम ने इस रेस मे बहुत कुछ जीत लिया है। इतना तुमने पहले कभी किसी रेस मे नही जीता। यह भीड किसी विनर के लिये उत्साहित नही है।

ऐसा ही जिन्दगी मे होता है। तुम किस लिये भाग रहे हो? क्या जीत ही तुम्हारे जीवन मे सब कुछ है? तुम किसके खिलाफ दौड़ रहे हो, अगर तुम सब से जीत जाते हो।

जल्द ही लोग तुम्हारे लिये cheer करना छोड़ देंगे। अगर तुम कभी पीछे मुड कर देखोगे तो प्रशन यह होगा की तुम किसके खिलाफ दौड़ रहे थे?

जो तुम्हारे साथ दौड़ रहा था क्या वह कोई कमजोर था? क्या तुमने उसकी मदद की थी? क्युंकि सबसे अच्छी रेस वो होती जिसे तुम सभी ने मिल कर खत्म किया हो।

इसलिए इस जिन्दगी के रेस मे दौड़ो मगर तुम जीतते हो या हारते हो यह मह्त्व नही रखता है। परंतु तुम इस रेस को कैसे दौडते हो यह महत्व रखता है।

धन्यवाद ।

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको ज़िन्दगी के race में कौन जीतता है? की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।

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