किसान ने छोड़ा गुस्से में घर फिर हुआ गलती का एहसास|Moral stories in hindi

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Moral stories in hindi की सुरुआत

यह कहानी है एक ऐसे मनुष्य की जिसने अपने जीवन से परेशान हो कर घर बार छोड़ दिया। साथ साथ उसने अपनी पत्नी और बच्चो को भी छोड़ दिया।

यह बाद बहुत समय पहले की है एक गाव मे एक आदमी रहता था जिसका नाम शाम था। शाम की एक पत्नी और दो बच्चे भी थे सभी साथ रहते थे।

शाम किसान था खेती करता था और अपना जीवन यापन करता था। शाम अपने जिन्दगी से धीरे धीरे परेशान होने लगा। वह घर मे भी चैन से नही रह पा रहा था। 

तब एक दिन उसने सोचा मै कही दूर चला जाऊंगा। सब घर बार छोड़ कर। एक रात शाम ने घर मे सब के सोने के बाद आधी रात को घर से निकल गया। उसे अपने बच्चो, पत्नी और गांव सब को छोड़ वह बस निकल गया।

शाम बस चलता जा रहा था ना तो उसे यह पता था की कहा जाना है। क्या करना है शाम अंदर से बहुत परेशान था। वह चलता चलता एक जंगल मे जा पहुंचा।

वहां उसने देखा की भगवान बुद्ध अपने कुछ शिष्यों के साथ एक पेड़ के निचे बैठे हुये हैं। शाम सोचता है मै भी सन्यासी बन जाता हूं। 

किसान चला सन्यासी बनने Moral stories in hindi

वह भगवान बुद्ध के पास जाता है और कहता है भगवान मुझे भी सन्यांसी बनना है। मै भी आपके साथ जुड़ना चाहता हूं।

भगवान बुद्ध शाम को अपने Hindi kahaniya साथ रख लेते है। शां संन्यासी के भाती अपना वेश भुशा धारण कर चल पड़ता है।

कुछ दिन हो चुके थे एक दिन भगवान बुद्ध अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे शाम भी साथ मे ही था। 

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भगवान बुद्ध को प्यास लगी उन्होने अपने नये शिष्य से कहा यहा से कुछ दूर पर एक तालाब है तुम वहां से पीने के लिये पानी ले आओ।

शाम मटका ले कर निकल पड़ता है। जब वह वहां पहुचत है वह देखता है की पानी मे कुछ जंगली जानवर है। जो शाम को देख कर भाग जाते हैं। जानवरों के दौड़ भाग से पानी बहुत गंदा हो जाता है।

शाम बिना पानी लिये वापस लौट जाता है और भगवान बुद्ध से कहता है। भगवान पानी बहुत गंदा है उसे पिया नही जा सकता।

 भगवान बुध यह सुन कर शाम को बोलते है तुम जाव उसी तालाब से पानी ले आओ।

शाम जब इस बार तालाब के पास पहूंचता है वह देखता है की पानी बिल्कुल साफ है। वह आसचर्यचकित हो जाता है। वह पानी ले कर भगवान बुद्ध के पास जाता है। शाम भगवान बुद्ध से पूछता है। 

सीख वाली stories in hindi

भगवान जब मै दूसरी बार पानी लेने गया पानी बिल्कुल साफ था ऐसा कैसे हुआ। 

भगवान बुद्ध कहते हैं जानवरों के दौड़ भागी से जो पानी कीचड़ हो गया था उसे थोड़ी देर शांत छोड़ देने से पानी का कीचड़ निचे बैठ जाता है और पानी साफ हो गया।

ठीक मनुष्य के साथ भी ऐसा ही होता है। जब वह परेशान होता है उसका मन बिलकुल बिचलीत होता है वह हमेशा गलत फैसले लेता है। जब मनुष्य शांत बैठ कर कोई फ़ैसला लेता है वह फ़ैसला कभी गलत नही होता।

यह सुनने के बाद शाम को अपनी गलती का ऐहसास होता है। उसे समझ आ जाता है की उसका घर छोड़ने का फैसला गलत था। वह भगवान बुद्ध से आज्ञा ले कर अपने घर लौट जाता है।

सीख:- इंसान को कभी भी कोई फ़ैसला गुस्से मे नहीं लेना चाहिये। गुस्से मे लिया गया फैसला हमेशा गलत होता है। 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको  किसान ने छोड़ा गुस्से में घर फिर हुआ गलती का एहसास|Moral stories in hindi  की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।

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