5 best short moral stories in hindi:- Hindi kahaniya

5 best short moral stories in hindi|Hindi kahaniya

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यह पंचत्रंत की hindi kahaniya मजेदार होने के साथ- साथ बच्चों को कुछ नई सिख देती हैं। इस पोस्ट में पंचत्रंत की 5 ऐसी कहानियां हैं जो बच्चो को जरूर पढ़नी चाहिए। moral stories in  hindi,पढ़े और सीख लें। 

1 .Thirsty crow story in Hindi ( प्यासा कौवा)


गर्मियो का मौसम था। सूर्य अपनी ताप से चारो तरफ कहर मचाये हुये था। सभी नदी, तालाब सुख गये थे।

 पीने का पानी भी मुस्किल से मिल रहा था। इसे सभी इंसान तो परेशान थे ही जानवरों और पक्षियों का भी बुरा हाल था।
वही एक कौवा भी पानी के लिये दर दर भटक रहा था।
 वह कौवा बहुत प्यासा था। प्यासा कौवा पानी की खोज करते करते जंगल से निकल कर गाँव जा पहुँचा। प्यासे कौवा ने एक घर के बाहर एक मटका देखा जिसमे थोडा पानी था जिसे कौवे की प्यास बुझ सकती थी। कौवा सोचने लगा मै यह पानी कैसे पियुं। hindi kahaniya 
तभी उसे एक आइडिया आता है। कौवा वहां पड़े कुछ पत्थर एक एक कर मटके मे डालने लगा। 
जिसे पानी उपर आने लगा। प्यासे कौवे ने कुछ और पत्थर डाले जिसे पानी बिल्कुल मटके के उपर तक आ पहूंचा। जिसे पी कर कौवे ने अपनी प्यास बुझाई।

सीख:- अपनी अकल का इस्तेमाल कर हम किसी भी मुसीबत से बाहर आ सकते है। भले ही परिस्थियां कैसी भी हो।

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2 .Bandar aur magarmach ki  kahani (बन्दर और मगरमच्छ की कहानी) 【Hindi kahaniya】

 जंगल के बिचो बिच एक विशाल नदी बहता था। उस नदी मे एक मगरमच्छ अपनी पत्नी के साथ रहता था।

 मगरमच्छ बुढ़ा हो रहा था। इसी कारन उसे शिकार करने मे बहुत मुस्किल होता था। एक दिन मगरमच्छ शिकार ना मिलने की वज़ह से बहुत परेशान था। 
वह नदी के किनारे एक पेड़ के निचे जा बैठा। वहां उसने देखा की पेड़ पर एक बन्दर फल खा रहा है। मगरमच्छ ने बोला यह क्या खा रहे हो बन्दर भाई? मुझे भी खिलाओ! hindi kahaniya 
बन्दर ने जवाब दिया यह जामुन है। बहुत ही मीठा फल है लो तुम भी खाओ। यह कह कर बन्दर ने मगरमच्छ को जामुन दिया। मगरमच्छ ने उसे खाते ही कहा। वाह मज्जा आ गया। यह तो बहुत मीठा है।
मगरमच्छ मे बन्दर से कहा तुम्हारा बहुत शुक्रिया मुझे बहुत भूख लगी थी। तुम मुझसे दोस्ती करोगे बन्दर भाई ? मुझे बहुत खुशी होगी अगर तुम मेरे दोस्त बनोगे।
 तुम बहुत अच्छे हो। यह सुन बन्दर खुश हुआ और कहा हां हां जरुर मै तुमसे दोस्ती करूंगा। तुम्हे जब भी भूख लगे तुम यही मेरे पास आ जाना मै इसी पेड़ पर रहता हूं। मै तुम्हे मीठे जामुन खिला दिया करूंगा।

उस दिन के बाद मगरमच्छ बन्दर के पास रोज जाता और बन्दर उसे जामुन खिलता। दोनो बहुत अच्छे दोस्त बन चुके थे। वह साथ मे बहुत मस्ती करते थे। 

कभी मगरमच्छ पेड़ के निचे आ कर मस्ती करता तो कभी बन्दर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ कर नदी की सैर करता था।

एक दिन मगरमच्छ ने बन्दर से कहा भाई बन्दर मुझे थोडे जामुन तोड कर दे दो। मै यह जामुन अपनी पत्नी को भी खिलाना चाहता हूं।

 बन्दर ने जामुन तोड कर मगरमच्छ को दे दिया। मगरमच्छ जामुन ले कर अपनी पत्नी के पास गया। देखो मै तुम्हारे लिये मीठे जामुन लाया हूं। यह मेरे दोस्त बन्दर ने तुम्हारे लिये भेजवाया है।
 मगरमच्छ की पत्नी बहुत खुश होती है और जामुन खाती है। जामुन उसे पसंद आते है। 
तभी वह कहती है ये जामुन इतना मीठा है तो उस बन्दर का कलेजा कितना मीठा होगा जो यह मीठे जामुन रोज खाता है। मगरमच्छ ने कहा हां बहुत मीठा होगा वह रोज मुझे भी जामुन खिलता है।

तभी उसकी पत्नी ने कहा मैने वहुत दिन मांस नही खाया है। और इस बन्दर का तो कितना मीठा कलेजा होगा। यह सोच कर ही मेरे मुह मे पानी आ रहा है।

 मगरमच्छ की पत्नी ने कहा उसे बन्दर का कलेजा खाना है। मगरमच्छ बोलता है मै यह कैसे कर सकता हूं। वह मेरा दोस्त है उसने मुझे खाना खिलाया है। तुम्हारे लिये मै अपने दोस्त की जान नही ले सकता।
तभी उसकी पत्नी गुस्से से कहने लगी अगर तुम मुझे बन्दर का कलेजा नही ला कर दे सकते तो मै अपनी जान दे दूंगी। यह सुन कर मगरमच्छ (magarmach) निराश मन से बन्दर के पास जाता है। 
बन्दर भाई बन्दर भाई तुम्हारे जामुन खा कर मेरी पत्नी बहुत खुश हूई और उसने तुम्हे खाने पर बुलाया है। बन्दर खुश हो कर बोलता है हां चलो मै तैयार हूं। 
लेकिंन मै नदी मे कैसे चलूंगा। मगरमच्छ बोलता है तुम मेरे पीठ पर बैठ जाओ। बन्दर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ जाता है मगरमच्छ उसे अपने घर की तरफ ले जाने लगता है।
 तभी रास्ते मे मगरमच्छ बोलता है बन्दर भाई मुझे माफ कर देना। बन्दर पूछता है किस बात के लिये माफ कर दूँ। मगरमच्छ ने कहा मेरी पत्नी तुम्हरा कलेजा खाना चाह्ती है अगर उसने तुम्हारा कलेजा नही खाया तो वह मर जायेगी। 
यह सुन कर बन्दर अंदर से घबरा गया लेकिन उसने अपना दिमाग चलाया और एक तरकीब लगाया। बन्दर मुस्कराकर कहा बस इतनी सी बात लेकिन तुमने यह बात मुझे चलने से पहले क्यू नही बताया?
 मैने अपना कलेजा तो पेड़ पर ही छोड दिया है। हम बन्दर अपना कलेजा पेड़ पर ही रखते हैं। चलो वापस उस पेड़ के पास और कलेजा ले आते है। (Hindi kahaniya)

मगरमच्छ बोलता है मै भी कितना मूर्ख हूं। अगर हम बिना कलेजा लिये घर जायेंगे तो मेरी पत्नी मेरा कलेजा खा जायेगी। मगरमच्छ वापस उस पेड़ के तरफ चलने लगता है। 

जब मगरमच्छ नदी के किनारे पहुँचता है बन्दर कूद कर पेड़ पर चढ़ जाता है। और कहता है अरे! बेवकूफ क्या कोई कलेजा निकाल के भी जिंदा रहता है क्या। 
मैने तुम्हे अपना दोस्त समझा तुझे फल खिलाया  और तूने मुझे धोखा दिया। चल भाग यहां से अब ना तुझे जामुन मिलेंगे और ना ही कलेजा चला जा यहा से। मगरमच्छ वहा से चला जाता है।

मगरमच्छ ने अपनी बेवकूफी की वजह से दोस्ती और जामुन दोनो से हाथ धो बैठता है।

सीख:- हमे कभी भी घबराना नही चाहिये और किसी भी हाल मे धोखा नही देना चाहिये। वरना हमे भी मगरमच्छ की तरह मुह की खानी पड़ेगी।

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3. शेर और ख़रगोश की कहानी


एक बार की बात है। एक बड़े घने जंगल मे एक शेर रहता था। वह हर रोज शिकार करता था और जंगल के कई जानवरो को मार देता था। इसे जंगल के सभी जानवर परेशान हो गये थे। 

आपस मे बात कर रहे थे की अगर ऐसा चलता रहा तो जल्द ही सभी जानवर जंगल से समाप्त हो जायेंगे। (Hindi kahani)
सभी जानवरो ने एक साथ मिल कर एक फैसला लिया की वह हर रोज एक जानवर, शेर की गुफा मे छोड जायेंगे। यह परस्ताव ले कर सभी जानवर शेर की पास गये।
लोमडी ने कहा, हे जंगल के राजा आप हर होज इतने जानवरों को मार दंगे तो सभी जानवर खत्म हो जायेंगे। आप एक दिन मे एक ही जानवर का सेवन करे। (sher aur khargosh ki kahani in hindi with image)
 हम हर रोज एक जानवर आपकी गफ्फा मे दे जायेंगे। शेर ने सोचा मुझे तो खाने से मतलब है और कहा ठीक है।
उस दिन के बाद से हर रोज एक जानवर शेर के पास उसका भोजन बन कर जाने लगा। एक दिन जब एक खरगोश की बारी आई। खरगोश उदास हो कर  शेर की गुफ्फा की ओर जाने लगा। रास्ते मे उसे एक कुआँ दिखा।
 खरगोश उस कुएँ के पास जाता है तभी खरगोश की परछायी कुएँ मे दिखती है। खरगोश के दिमाग मे एक योजना आती है। खरगोश शेर के पास जाता है। शेर खरगोश को बोलता है तुम्हे आने मे इतनी देर क्यूं हो गई। (chalak khargosh)

तभी खरगोश बोलता है महाराज मै तो समय पर ही आ रहा था। लेकिन रास्ते मे मुझे एक दुसरे शेर ने रोक लिया।

 मैने उसे आपके बारे मे बतया फिर भी उसने मुझे आने नही दिया और कहा मै तुम्हारे महाराज को मार दूँगा और मै महाराज बनूंग। मै जैसे तैसे बच के भाग कर आया हूं। 
यह सुन कर शेर गुस्से मे आ गया। कौन है वो जिसने मुझे इस जंगल के राजा को चुनौती दी है। चलो मुझे उस शेर के पास ले चलो कहा रहता है वो।

खरगोश बोलता है आप मेरे पीछे आइये महाराज मै आपको उसके पास ले जाता हूं। 

खरगोश शेर को उस कुएँ के पास ले जाता है। देखीये महाराज यही कुआँ है जिसमे वह शेर रहता है। शेर कुआं मे झाक कर देखता है शेर की परछाई उसे दिखती है।
 शेर उसे देख दहाड़ मारता है शेर की परछाई भी वैसा ही करती है। इसे देख खरगोश बोलता है देखीये महाराज वह भी आपको देख कर दहाड़ मार रहा है। 
शेर कुछ कदम पीछे आता है और छलांग मार कर कुआं मे कूद जाता है। शेर कुंआ से बाहर निकलने का रस्ता नही खोज पाता है और पानी मे डूब जाता है। (sher aur khargosh ki kahani in hindi with image)

यह बात खरगोश ने जंगल के सभी जानवरों को बताया। सभी बहुत खुश हुए और खरगोश को नायक मानने लगे। खरगोश ने अपनी बुद्धि से केवल अपनी ही नही बाकी जानवरों की भी जान बचाई। Hindi kahani

सीख:- बुद्धि इंसान की ताकत होती है। हम इसका इस्तेमाल कर कुछ भी कर सकते है।

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4 .kachua aur khargosh short story in hindi (कछुआ और खरगोश)


किसी जंगल मे एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही घमंडी था उसे घमंड था की वह तेज दौड़ सकता है। 

खरगोश जंगल मे मौजूद कछुआ का बहुत मजाक उड़ाया करता था। एक दिन खरगोश ने कछुआ को बोला क्यू काका मुझसे रेस लगओगे? (Hindi kahaniya)

 चलो उस पहाडी तक का रेस लगाते है। कछुआ ने  बोला हां क्यू नही। यह बात पूरी जंगल मे फैल गई की कछुआ और खरगोश का रेस होने वाला है। 
इस अनोखे रेस को देखने के लिये जंगल के सभी जानवर आये।
रेस की शुरुआत हूई। खरगोश अपनी लम्बी टांग का इस्तेमाल करते हुए आगे भाग गया। बेचारा कछुआ अपनी धीमी चाल से रेस मे आगे बढ रहा था। खरगोश बहुत आगे निकल चुका था। (kachua aur khargosh story in hindi with moral)
 तभी वह पीछे मुड कर देखता है तो कछुआ नही दिखता है। खरगोश सोचता है उसे आने मे बहुत समय लगेगा। तब तक मै आराम कर लेता हूं। 
इसलिए खरगोश एक पेड़ के निचे आराम करने लगा और उसकी आंखे लग गई वह सो गया। इधर कछुआ अपनी धीमी चाल से आगे बढ़ता रहा और रेस खत्म कर दिया।(Hindi Kahani)
  इधर खरगोश अपनी नीन्द से जागता है और आगे भागता है। रेस की सीमा रेखा तक पहुच कर देखता है की कछुआ वहा पहले से पहुचा हुआ है। 
कछुआ रेस जीत चुका है।
तभी खरगोश को अपनी गलती का एहसास होता है और वह कछुआ से माफी मांगता है।

सीख:- हमे कभी किसी चिज का घमंड नही करना चाहिये। और ना ही किसी का मजाक बनाना चाहिये। कछुआ ने एक बात साबित किया की अगर कोई भी काम को स्थिरता से किया जाये तो हमे  जीत जरुर  मिलेगी।

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5 .Do billi aur bandar ki kahani (दो बिल्ली और चालाक बन्दर)


एक बार की बात है दो बिल्लियाँ आपस मे बहुत अच्छे दोस्त थे। एक दिन वह भूख से बहुत परेशान थे। 

उन्हे भोजन नही मिला था। तभी उन्होने खाना चोरी करने का प्लान बनाया। एक घर मे वह बिल्लियाँ खाना चुराने गई तभी बर्तन की आवाज सुन घर के मालिक खाने के पास आ गया। बिल्लियाँ वहा से दुम दबा कर भाग गई। 
 फिर उन्होने दुसरे घर मे घुसा वहा से उन दोनो ने एक रोटी चुरा ली।
अभी उस रोटी को दो बराबर हिस्से मे बाँटने की कोशिश की लेकिन दोनो संतुस्ट नही थे उस बटवारे से। 
दोनो बिल्ली आपस मे लड़ने लगी यह सब एक बन्दर पेड़ पर बैठ कर देख रहा था। उसने कहा तुमलोग आपस मे क्यू लड़ रहे हो।
 मै तुम्हारी मदद करूंगा इस रोटी को बराबर हिस्से मे बाँटने के लिये। बन्दर एक तराजू लाया। बन्दर ने तराजू के दोनो ओर आधी आधी रोटी रखी। (do billi aur bandar hindi kahani )
 तभी तराजू का एक हिस्सा ज्यादा भारी है कह कर उधर वाले रोटी के  हिस्से का थोडा भाग खा जाता है। 
खाने के बाद बन्दर फिर से तराजू मे तौलता है। इस बार दुसरा हिस्सा भारी हो जाता है तब बन्दर दुसरे हिस्से से थोड़ा रोटी खा जाता है। ऐसा करते करते बन्दर सारी रोटी खा जाता है।

बिल्लियाँ भुखी ही रह जाती है।

सीख:- दो लोग की लड़ाई मे कोई तीसरा फायदा उठा जाता है। ऐसा ही हुआ इस हिन्दी कहानी मे दो बिल्लियों की लडाई मे बन्दर ने फायदा उठाया।

निष्कर्ष

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको 5 best short moral stories in hindi Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
और रोमांचिक कहानियां है निचे पढ़े।

धन्यवाद। 

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