सोना कौन लेगा? अंधा या लंगड़ा?|अंधे और लंगड़े की मित्रता की अनोखी कहानी

अंधे और लंगड़े की मित्रता की अनोखी कहानी | Hindi kahani 

नमस्कार दोस्तों आपका hindikahaniyauniverse.com में स्वागत है। इस blog पे आपको अंधे और लंगड़े की मित्रता की अनोखी कहानी, Horror Hindi kahaniya …इन्ही तरह के और भी  Hindi kahaniya पढ़ने को मिलेंगे ।

कहानी की सुरुवात

बहूत समय पहले की बात है एक गाँव मे एक लंगड़ा रहता था। जिसका नाम बहादुर सिंह था। वह अकेला रहता था वह बचपन से लंगड़ा नही था। एक हादसे मे उसने अपने पैर खो दिये थे। 

बहादुर सिंह को बहुत कष्ट होता था कही आने जाने मे। एक दिन लंगड़े बहादुर सिंह को पास के गाँव मे किसी काम से जाना था। बहादुर सिंह दुसरे गाँव जाने के लिये निकल पड़ा रास्ता बहुत ही टूटा फूटा उबड़ खाबड़ था। 
जिसे बहादुर सिह बहुत थक गया था वह एक पेड़ के निचे जा बैठा। उस पेड़ के निचे एक इंसान पहले से ही बैठा था। बाहदुर ने उसे पुछा आपका नाम क्या है। दुसरे आदमी ने बताया की उसका नाम सूरदास है। वह देख नही सकता। 
दोनो आपस मे बाते कर रहे थे। बातो ही बातो मे लंगड़े बहादुर सिंह को पता चला की अन्धा सूरदास को भी उसी गाँव जाना है जहां बहादुर सिंह जा रहा था। तभी लंगड़े ने एक प्लान बनाया और अंधे सुरदास को कहा मेरे पास एक योजना है अगर तुम साथ दो तो हम दोनो आसानी से एक दुसरे के काम आ सकते हैं।

सुरदास ने पुछा क्या योजना है? बहादुर सिंह ने बताया की अगर तुम मुझे अपने कंधे पे बैठा कर चल सकते हो तो मै रस्ता दिखा सकता हूं। 【Hindi kahani】

मै तुम्हारी आंख बन सकता हूं और तुम मेरे पैर। यह सुन अन्धा खुश होता है और लंगड़े को कहा मै तैयार हूं। सूरदास ने बहादुर सिंह को अपने कंधे पर बैठा कर चलने लगता हैं। लंगड़ा रास्ते दिखाते गया और अन्धा चलता गया। दोनो की काफी अच्छी दोस्ती हो गई। दोनो अब आपस मे मिल जुल कर रहने लगे। दोनो एक दुसरे की कमी पुरी करते थे।
काफी दिन हो गये दोनो की जिन्दगी अच्छी गुजर रही थी। एक दिन दोनो जंगल के रास्ते कही जा रहे थे। तभी लंगड़े को एक पोटली दिखी जो एक झाडी मे थी। उसने अन्धे को कहा दोस्त मुझे एक पोटली दिख रही है चलो देखे क्या है उसमे। तभी अन्धा बोलता है किधर जाना है, रास्ता बताओ । 

अंधा और लंगड़ा के बीच लड़ाई | Hindi kahaniya

दोनो उस पोटली के पास पहुचते हैं। बहादुर सिंह पोटली खोलता है और उसे देख चौंक जाता है क्युन्की उस पोटली मे हीरे जवरात रहते हैं। बहादूर सिंह सूरदास को बताता है की क्या है पोटली मे। दोनो बहुत खुश होते हैं। 
तभी अन्धा लंगड़े को कहता है चलो पोटली इधर लाओ, लंगड़ा कहता है यह मेरा है मैने इसे देखा। लंगड़ा कहता है यह मेरा है मेरी टांगो ने यहा लाया। दोनो आपस मे लड़ने लगे।
तभी उसी रास्ते से एक योगी पुरूष आ रहे थे। दोनो ने उन्हे बुलाया और कहा ही इसका फैसला करे बाबा। यह पोटली किसकी है दोनो ने पूरी बात बताई।
 योगी ने बहुत सरलता से उन्हे कहा इस पोटली पर तुम दोनो का बराबर अधिकार है। क्युंकि एक की आखो ने देखा तो दुसरे के पैरो ने उस पोटली तक पहूंचाया। आपस मे तुम दोनो मत लडो। इस पोटली के लिये तुम दोनो अपनी दोस्ती खराब मत करो। यह पोटली का समान तो खत्म हो जायेगा। 【Hindi kahaniya】
 लेकिन तुम दोनो की दोस्ती हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी। उनकी बाते सुनकर दोनो ने लड़ाई बन्द कर दिया और आधा आधा हीरा जेबरात बाट लिया। दोनो इस निर्णय से खुश थे। दोनो की दोस्ती सलामत रही और उनका एक दुसरे के प्रति और विश्वास बढ गया।

सीख:- इस हिंदी कहानी से हमें यह सिख मिलती है की हमें किसी चीज़ या सामान के लिए कभी नहीं लड़ना चाहिए। इंसान अगर एक दूसरे की मदद करेगा तो दुनिया में सब खुश रहेंगे। अगर कोई दोस्ती या रिस्तेदारी कुछ रूपये और पैसे के लिए टूट जाए तो वह दोस्ती या रिस्तेदारी सच्ची नहीं होती।


निष्कर्ष 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको अंधे और लंगड़े की मित्रता की अनोखी कहानी की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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