Life का क्या goal होता है इस कहानी में देखे|व्यक्ति को कैसा जीवन जीना चाहिए

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व्यक्ति को कैसा जीवन जीना चाहिए

बहुत समय पहले एक बहुत बुद्धिमान आदमी रहता था। वह अपने गांव का मेयर था।

गांव के सभी लोग उसकी बातें मानते थे, उसके सुझव,विचार की गांव के सभी लोग इज्जत करते थे। बहुत सारे लोग उस आदमी के पास सुझाव लेने आते थे।

उस मेयर का एक बेटा था,वह बहुत आलसी था वह दिन भर सोता रहता था और अपने दोस्तो के साथ घूमता रहता था। मेयर कितना भी उसे डांटता और डराता था, वह नही बदलता था।

कई साल ऐसे ही गुजर गये,मेयर की उम्र भी अब ढल रही थी। जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ रही थी वह अपने बेटे के भविष्य को ले कर उतना ही चिंतित होने लगा था।

मेयर को ऐहसास हो गया था की उसे उसके बेटे को कुछ ऐसा देना होगा,जिसे वह भविष्य मे अपना और अपने परिवार का ध्यान रख सके और पेट भर सके।

एक दिन मेयर अपने बेटे को कहता है, बेटे अब तुम बच्चे नही रहे।अब तुम्हे जिम्मेदारियाां लेनी चाहिये और अपने जीवन को समझना चाहिये। मै चाहता हूं की तुम अपने जीवन का सही मतलब खोजो।

व्यक्ति को कैसा जीवन जीना चाहिए और ज़िन्दगी का goal क्या होना चाहिए

हमेशा याद रखना,अगर तुमने एक बार अपने जीवन का लक्ष्य खोज लिया, तुम हमेशा खुशहाल जिंदगी जियोगे।

ऐसा कहते हुए, मेयर ने अपने बेटे को एक बैग दिया। बेटे ने बैग खोला, उसमे चार मौसम के हिसाब से चार कपड़े थे। हर एक कपड़ा एक मौसम के लिये।

साथ ही उस बैग मे कुछ खाने के समान,कुछ पैसे और एक नक्शा था। मेयर ने अपने बेटे से कहा मै चाहता हूं की तुम एक खजाना खोज कर लाओ।

मैने बैग मे एक नक्शा भी रख दिया है,जहां खजाना छुपा हुआ है। तुम्हे बस उस जगह जाना है और खाजाने को खोज कर लाना है।

लड़का बहुत खुश हुआ और पहली बार उसे अपने पिता के कुछ कहने पर उसे इतनी खुशी हो रही थी। अगली सुबह वह अपने समान के साथ खजाने की खोज करने के यात्रा पर निकल गया।

उसे बहुत दूर जाना था, पहाड़ो के पार,बॉर्डर के पार,कई नदियों के पार खजाने का स्थान था।

जहां उसे जाना था। देखते देखते दिन सप्ताह, सप्ताह महीनो मे बदलने लगे। रास्ते मे वह बहुत सारे लोगो से मिला।

किसी ने उसकी खाने से मदद की तो किसी ने उसको ठहरने का स्थान दिया।

उसे ऐसे लोगो का भी सामना करना पड़ा जो उसे लूटना चाहते थे। उसने अच्छाई बुराई सभी चीज़ो का अनुभव किया ।

धीरे धीरे मौसम बदला और स्थान भी जब मौसम खराब होता था वह कही आश्रा लेता और अगले दिन अपनी यात्रा फिर से शुरु कर देता।

एक साल और कई महीने बाद वह अपने लक्ष्य पर पहूंच जाता है। वह एक खाली स्थान था और वहां एक पेड़ था।

उसने वहां खुदाई चालू की, 2 दिनो तक खुदाई करने के बाद भी उसे कुछ नही मिला। उसने चारो तरफ देख लिया पेड़ के उपर भी देखा, लेकिन उसे कुछ नही मिला।

तीसरे दिन उसने परेशान हो कर छोड़ दिया। वह अपने पिता के झूठ से बहुत नाराज था।

वह अपने घर की तरफ लौटने का निश्चय किया और अपने घर जाने की यात्रा शुरु की।

घर लौटते समय भी उसने मौसम के बदलाव देखे। लेकिन इस बार वह मौसम के मजे ले रहा था। उसने dancing birds को dance करते देखा।

उसने सूर्यास्त देखने के लिये डेरा डाला। उसने रहने के लिये झोपड़ी बनाना सीख लिया था। अपनी भूख मिटाने के लिये उसने शिकार करना भी सीख लिया था।

उसने कपड़े सिलना भी सीख लिया था। उसने सूर्य की मदद से घड़ी देखना भी सीख लिया था और अपने आगे की यात्रा की प्लानिंग करता था। उसने जंगली जानवरों से खुद की रक्षा करना भी सीख लिया था।

रास्ते में वह उन लोगो से भी मिला जिसने उसकी मदद की थी। इस बार वह उन लोगो के साथ कुछ दिन रुका और उनकी मदद की।

बस उनका धन्यवाद कहने के लिये। उसे ऐहसास हो गया था की वो लोग कितने अच्छे थे।

उन्होने एक ऐसे व्यक्ति की मदद की थी जो उनके लिये बिल्कुल अंजान था वह उनको उसके मदद के बदले कुछ दे नही सकता था, फिर भी उनलोगो ने उस्की मदद की थी।

जब वह घर पहूंचा उसे ऐहसास हुआ की 3 साल बीत चुके हैं जब से उसने घर छोडा था।

वह सीधा घर के अंदर अपने पिता के पास गया। मेयर ने अपने बेटे को देखते ही जोर से गले लगाया। मेयर ने कहा कैसी रही यात्रा बेटे? क्या तुम्हे खाजाना मिला?

बेटा कहता है,यात्रा बहुत अदभूत थी पिताजी लेकिन मै क्षमा चाहूँगा। मुझे वहां कोई खजाना नही मिला, शायद किसी ने उसे मेरे पहूंचने से पहले ही निकाल लिया था।

मेयर अपने बेटे के मुह से ऐसी बाते सुन चौक गया। लड़का बिल्कुल भी गुस्सा नही था अपने पिता पर।

मेयर मुस्कराकर कहता है वहां कोई खजाना नही था बेटे, लड़का पूछता है तो आपने मुझे वहां खजाना खोजने के लिये क्यू भेजा था।

मै इसका जवाब जरुर दूँगा, लेकिन उसे पहले यह बताओ को यात्रा कैसी थी? क्या तुमने मजे किये?

बिल्कुल नही पिता जी, मेरे पास समय नही था मै परेशान था कही कोई दुसरा उस खजाने को मेरे से पहले ना खोज ले।

लेकिन मैने लौटते समय यात्रा के पुरे मजे लिये। मैने कई दोस्त बनाए, मैने कई कलाएँ सीखी,मैने जिन्दा रहने की कला सीखी।

मैने बहुत सारी चीजे सीखी जिसके कारण मुझे खजाने ना मिलने का कोई गम नही था।

मै यही चाहता था बेटे, की तुम अपने जीवन के लक्ष्य को ढूंढो। लेकिन अगर तुम अपने लक्ष्य पर बहुत ज्यादा केन्द्रित रहोगे, तब तुम जिंदगी के असली खजाने को खो दोगे।

व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन जीना चाहिए

जीवन का कोई लक्ष्य नही होता है। यह एक ऐहसास करने की चीज़ है।

जीवन का लक्ष्य होता है उसे जीना,खुल कर जीना नये नये चीज़ो का सामना करना, नई जगहों पर जाना,उसे ऐहसास करना, अपने डर का सामना करना और नये नये चीजो का सामना करना उनका अनुभव करना।

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको व्यक्ति को कैसा जीवन जीना चाहिए की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।

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