मेंढक ने अपने परिवार की सुपारी दी|मेंढक और सांप की कहानी

मेंढक ने अपने परिवार की सुपारी दी|मेंढक और सांप की कहानी

नमस्कार दोस्तों आपका hindikahaniyauniverse.com में स्वागत है। इस blog पे आपको inspirational Hindi kahani, मेंढक और सांप की कहानी इन्ही तरह के और भी kahaniya पढ़ने को मिलेंगेमेंढक और सांप की कहानी ।

कहानी की शूरुआत

एक बार एक मेंढकों का राजा था। जिसका नाम गंगादत्त था। वो अपने कुछ रिश्तेदारों  से ज्यादा बात नहीं करता था।

क्यूंकि उनका व्यवहार गंगादत्त  के प्रति बहुत रुखा था। एक दिन गंगादत्त अपनी पत्नी के पास गया और बोला उनकी हिम्मत कैसे हुई मुझसे ऐसे बात करने की मैं राजा हूँ।

 मैं उन्हें जरूर सबख सिखाऊंगा। सभी मेंढक एक कुएं में साथ रहते थे।

 गंगादत्त की पत्नी ने उसे सावधानी वरतने को कहा नहीं तो वो भी मुसीबत में पड़ सकता है।

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 गंगादत्त  ने अपनी पत्नी के इस बात पे गौर नहीं किया और छलांग लगा कर कुंआ के बाहर आ गया और अपने पानी के चरखे पे बैठ गया।

 जैसे ही वह बाहर आया उसने एक साप को अपने बिल में जाते देखा। जिसका नाम शिवा था।   [Hindi kahaniya] 

 गंगादत्त को एक विचार आया। उसने उस साप को अपने घर न्योता देने का सोचा जिसे वो साप उसके भरस्ट रिश्तेदारों को खा जायेगा। राजा मेंढक साप के बिल के पास जाता है।

गंगादत्त :- अरे शिवा !! ज़रा बहार आओ तो।

साप अपने बिल में बैठा था। लेकिन वह बाहर नहीं आ रहा था। साप सोच रहा था कही उसका कोई दुसमन तो नहीं है। क्यों की साप के कोई दोस्त नहीं थे।

गंगादत्त ने फिर से आवाज़ लगाई और कहा “मैं मेंढकों का राजा गंगादत्त हूँ।  साप ये सुन कर हैरान  हो गया।लेकिन  उसे  जानने की  उत्सुकुता भी थी की ये यहाँ  क्यों आया है? साप बिल से बाहर आया।

गंगादत्त :- मैं यहाँ तुमसे दोस्ती करने आया हूँ।

साप :- ये नामुमकिन है ,हम दोस्त कैसे बन सकते है।  जब हम दुश्मन  हैं।

गंगादत्त:- हाँ ! हाँ! मैं  जानता  हूँ की हम पैदाइसी दुश्मन हैं।

लेकिन मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मैं चाहता हूँ की तूम मेरे सारे दुश्मनो को खा जाओ।

साप :- कौन  हैं तुम्हारे दुश्मन ?
गंगादत्त:- मेरे अपने रिश्तेदार। हम सब एक ही कुंए में रहते हैं। वो सब मेरी इज्जत नहीं करते इसीलिए वो मेरे दुश्मन बन गए हैं।

साप :- ओ अच्छा तुम कुएं में रहते हो।  मैं अंदर कैसे आऊंगा? और अगर आ भी गया तो उन्हें मारते हुए कहाँ बैठूंगा? इस सब का कोई मतलब नहीं।  भागो यहाँ से।  

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गंगादत्त:- रुको मेरे दोस्त मैं तुम्हे इसका रास्ता बताता हूँ और तुम्हे दिखता हूँ की पानी के सतह के ऊपर एक बिल है जिसमे तुम आराम से बैठ सकते हो। कृपया मेरी मदद करो !!!

साँप क्या निर्णय लेगा? मेंढक और सांप की कहानी

साप ने बहुत सोचा साप बूढ़ा हो रहा था। उसे मेंढक का प्रस्ताव पसंद आया। उसने निर्णय लिया की वो मेंढक का प्रस्ताव स्वीकार करेगा। साप ने मेंढक को कहा मै तुम्हारी मदद करूँगा।

गंगादत्त:- हाँ एक और बात तुम मेरे परिवार को नहीं खाओगे। जिसे मैं कहूंगा बस उससे खाओगे तुम।

साप :- तुम मेरे दोस्त हो। मैं तुम्हारे परिवार वालों को छुयूँगा भी नहीं।  चलो अब समय बर्बाद नहीं करते हैं।

गंगादत्त:- मैं आगे आगे चलता हूँ तुम मेरे पीछे पीछे आओ।

गंगादत्त अपने कुएं के पास आ गया और साप को बिल दिखाया और कहा तुम यही रहोगे जबतक मेरे रिस्तेदार नहीं आ जाते।  साप बिल में चला गया और इंतज़ार करने लगा।

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कुछ समय बाद  उसके रिस्तेदार कुएं में  उछाल कूद कर रहे थे। तभी गंगादत्त बोला वो है जो मुझे बहुत परेशान करते हैं।

 जाओ पकड़ो उन्हें। एक एक कर के साप ने मेंढक के सारे दुश्मनो को ख़तम कर दिया। गंगादत्त बहुत खुश हुआ।

फिर साप  शिवा ने चालाकी से सोचा जब गंगादत्त यहाँ नहीं होगा मैं यहाँ के एक दो और मेंढको को खा लूंगा।

साप :-मैंने तुम्हारे सारे दुश्मनों को खा लिया है।

गंगादत्त:- अब तुम अपने  बिल में वापस चले जाओ वैसे ही जैसे तुम आये थे मेरे दोस्त।

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साप :- क्या  वापस चला जाऊं, क्या मज़ाक कर रहे हो। अब तक कोई दूसरा साप मेरे बिल में आ चूका होगा। अब मैं वापस नहीं जायूँगा। मैं अब यही रहूँगा  और क्योंकी तुमने मुझे यहाँ बुलाया है तो मुझे खाना खिलाना तुम्हारा काम है। तुम्हे अपने दोस्तों और परिवार में से एक एक कर के मेंढक देने पड़ेंगे। वरना मैं सब को खा जायूँगा।

राजा मेंढक गंगादत्त सोचता है। “मैं कितना मुर्ख हूँ। मैं उसे यहाँ  लाया। अब  मेरे पास कोई रास्ता नहीं हैं।
गंगादत्त ने हर एक दिन साप  को एक मेंढक की भेट दी।

लेकिन यह साप रुका नहीं। जब गंगादत्त कुएं में नहीं होता साप एक दो और मेंढक को खा जाता था।

फिर एक दिन साप ने जो दूसरा मेंढक खाया वो गंगादत्त का बेटा था। गंगादत्त ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

गंगादत्त:- ये तुमने क्या किया, वह मेरा बेटा था। गंगादत्त पछताने लगा लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

 गंगादत्त रोने लगा लेकिन उसका रोना भी उसके बेटे को वापस नहीं ला पाया।

राजा मेंढक की बीवी बोली अब रोने से क्या फ़ायदा अब  तुम्हारी मदद कौन करेगा? तुम्ही अपने रिश्तेदारों को ख़त्म करना चाहते थे।

 तुम यहाँ से भागो नहीं तो उस साप को मारने का उपाए सोचो। कुछ दिन ऐसे ही बीत गए लेकिन गंगादत्त को कोई उपाए नहीं सुझा।

अब उस कुएं में कोई मेंढक नहीं बचा  था। सिवाए गंगादत्त के साप ने सबको खा लिया था।

साप :- मेरे मित्र गंगादत्त मुझे बहुत भूख लगी है।  मेरे लिए कुछ खाना लाओ, ये तुम्हारा काम है।

गंगादत्त ने सोचा ये सही समय है यहाँ से भाग जाने का। गंगादत्त ने साप से कहा मेरे दोस्त जब तक मैं हूँ तब तक तुम भूखे नहीं रहोगे।

मुझे यहाँ से जाने दो मैं तुम्हे दूसरे सारे कुएं से मेंढक ला कर दूंगा।

साप ने गंगादत्त से कहा मैंने अब तक तुम्हे अपने भाई की तरह समझा है।

  अगर तुम ऐसा कर देते हो। मैं तुम्हे अपने पिता सम्मान समझूंगा।

समय व्यस्त किये बिना मेंढक राजा वहा से चला गया और अपने लिए दूसरा कुएं ढूंढ लिया। और वही रहने लगा।
इसी बिच साप उसका इंतज़ार कर रहा था और सोच रहा था।   [Hindi kahaniya] 

 मुझे उसे जाने ही नहीं देना चाहिए था। कुछ दिन बाद बूढ़ा साप कुएं में रहने वाली एक छिपकिली की पास गया।

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बूढ़ा साप:- मैडम जी ! आप और गंगादत्त अच्छे दोस्त हो। उसे ढूंढो और जल्दी आने को कहो ,ठीक है अगर वो दूसरे मेंढको को नहीं ला पाया तो कोई बात नहीं मैं उसे नहीं खायूँगा। और मैं उसके बिना नहीं  रह सकता।

आखिरकार एक दिन छिपकिली को शिकार करते करते गंगादत्त दिख गया। छिपकिली उसके पास गई और कहा गंगादत्त तुम यहाँ क्या कर रहे हो?

तुम्हारा दोस्त साप  शिवा बहुत परेशान है उसने वादा किया है।  वो तुम्हे हानि नहीं पहुचायेगा। आओ घर चले। 

गंगादत्त ने कहा मुझे मेरा सबक मिल चूका है। एक भूखे जीव पे कभी भरोसा नहीं किया जा सकता । मुझे अपने रिस्तेदारो को पीठ नहीं दिखानी चाहिए थी। उनके साथ खुशी से रहना चाहिए था। अब मैं उस कुएं में कभी वापस नहीं जायूँगा।

कहानी सीख :- हमें कभी भी बुरे संगत का साथ नहीं लेना चाहिए। 


अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको मेंढक और सांप की कहानी की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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