भालू को दिखा भूत! | भूतिया बरगद का पेड़

भालू को दिखा भूत! | भूतिया बरगद का पेड़

नमस्कार दोस्तों आपका hindikahaniyauniverse.com में स्वागत है। इस blog पे आपको inspirational Hindi kahani, भूतिया बरगद का पेड़  इन्ही तरह के और भी  Hindi kahaniya पढ़ने को मिलेंगे ।

कहानी की शूरुआत

एक जंगल की बात है। उस जंगल में बहुत से जानवर रहते थे। सभी आपस में मिल जुल कर प्यार से रहते थे।

उसी जंगल में एक घना और पुराना  विशाल  बरगद का पेड़ थाजंगल के सभी जानवरों को ऐसा लगता था की उस पेड़ पर भूत रहता है।

कई बार कुछ जानवरों ने उस भूत  की आवाज़ सुनी थी। सभी जानवर  पेड़ से दूर रहते थे , कोई भी जानवर अकेला उस पेड़ के पास नहीं जाता  था।

फिर एक दिन उस जंगल  में भालू आया। वह उस जंगल में पहली बार आया।

भालू जंगल में अपनी गुफा  बनाने के लिए  जगह धुंढ़ रहा था। जगह  ढूंढ़ते- ढूंढ़ते  भालू उसी  बरगद के पेड़ के पास जा पहुँचा। [Hindi kahaniya]

भालू :- कितना विशाल पेड़ है ये , मै इस पेड़ के निचे अपना गुफा बना लेता हूँ। मेरी गुफा के लिए ये पेड़ बिलकुल सही रहेगा।

तभी वहाँ  से हाथी और बन्दर गुजर रहे थे।  उन्होंने भालू को बरगद के पेड़ के पास अकेला देखा तो चिंतित  हो गए।

हाथी :- अरे! भालू  क्या तूम इस जंगल में नए हो ? यहाँ अकेले क्या कर रहे हो ?

भालू :- मै आज ही इस जंगल में आया हूँ। अपनी गुफा के लिए जगह ढूंढ रहा था।  सोच रहा हूँ इस पेड़ के निचे ही गुफा बना लेता हूँ।  

हाथी :- इस पेड़ के निचे ? नहीं! नहीं ! ये पेड़ सुरक्षित  नहीं है।

बन्दर :- हाथी भाई ठीक कह रहे हैं। इस पेड़ पे भूत रहता है। आप चाहे तो मेरे पेड़ के निचे आ जाइएये। आप अपनी गुफा बना सकते है वहां पर।

भालू :- भूत ? अरे !भूत- वूत कुछ नहीं होता भाई।  उल्टा मैं इस विशाल  पेड़ के निचे  हर मौसम में सुरक्षित  रहूँगा।

मै  आप दोनों की चिंता समझता हूँ। पर मुझे भूत पे विश्वास नहीं है। आपकी चिंता के लिए धन्यवाद।

भालू और बन्दर :- ठीक है भाई ! जैसी आपकी मर्ज़ी ,अगर कभी हमारी जरुरत पड़े तो हमारे पास जरूर आना।

यह कह कर भालू और हाथी वहां से चले गए। भालू ने अपनी गुफा बनानी शुरू कर दी। शाम होने को थी। अचानक उस पेड़ से आवाज़ आई।

आआह्ह्ह आआह्ह्ह। .. ! तुम यहाँ अपनी गुफा बना रहे हो ? हाहाहाहाहा …..  तुम अब यहाँ से कही नहीं जा पाओगे। मै तुम्हे खा जायूँगा।  हाहाहाहाहा …….

भालू आवाज़ सुन कर बहुत डर जाता है। उसके गले से आवाज़ तक नहीं निकलती। फिर भालू हिम्मत कर के  पूछता है कौन  है वहाँ  ?   क्या सच में भूत है ?

पेड़ से आवाज़ आती है  हाहाहाहा  …..हाँ मै पेड़ पर रहने वाला भूत ही बोल रहा हूँ। अब मरने के लिए तैयार हो जाओ।

इतना सुनते ही  भालू वहां से भाग उठता है और बन्दर के पेड़ के पास जा पहुँचता है। और जोर जोर से बन्दर को आवाज़ लगाने लगता है।  बन्दर तेजी से निचे आता है और हाफते  हुए पूछता है।

बन्दर :- अरे ! भाई क्या हुआ ?इतना घबराये हुए क्यों हो ? 

भालू :- भूत! भूत ! भूत !… उस पेड़ पर भूत है। मैंने उसकी आवाज़ सुनी।

बन्दर :- अच्छा अच्छा अब शांत हो जाओ।  हमने तो पहले ही तुम्हे बताया था।

भालू :- हाँ हाँ  मुझे तुम्हारी बात पे भरोषा कर लेना चाहिए था। अब मैं वहां नहीं जाऊंगा।

बन्दर :- तूम अपनी गुफा यहाँ मेरे पेड़ के निचे बना लो। यहाँ तुम्हे कोई खतरा नहीं होगा।  [ bhutiya Hindi kahani]

भालू :- धनयबाद  बन्दर भाई।

असली भूत था कौन? | भूतिया बरगद का पेड़

भालू  ने अपनी गुफा वहां बना ली और आराम से वहां  रहने लगा।  एक दिन भालू जंगल में टहलने निकला इत्तेफ़ाक़ से भालू उस बरगद के पेड़ के पास जा पहुंचा।

वह वहां से जाने ही वाला था की एक गोरिला उस बरगद के पेड़ के पास जाता दिखा।

भालू गोरिला को सचेत करने के लिए उसके पीछे पीछे जाने लगा। लेकिन भालू के कुछ बोलने से पहले गोरिला पेड़ पे चढ़ गया।

भालू उसकी मदद  चाहता था पर उसको अपनी जान भी प्यारी  थी। इसीलिए भालू वहां से उलटे पाओं बन्दर के पास आ गया,बन्दर को सारा किस्सा  बताया।

भालू :- बन्दर भाई ! बन्दर भाई ! हमें उस गोरिला को भूत से  बचाना होगा। पता नहीं वह अब तक ज़िंदा होगा की नहीं ?

बन्दर :- गोरिला ? लेकिन उसे तो सब ने इस जंगल से बहार निकाल दिया था। वह सब को बहुत परेशान करता था। मुझे कुछ गड़बड़ लगती है। मै जा कर पता लगता हूँ।

बन्दर बरगद के पेड़ के पास गया और हिम्मत जूटा  कर पेड़ पर चढ़ गया।

बन्दर :- लगता है मेरे पेड़ पर कोई चढ़ गया है। कौन है यहाँ ? मै तुम्हे ढूंढ़ लूंगा और खा जायूँगा।


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गोरिला ने बन्दर की आवाज़ सुनी तो वह डर गया और पेड़ से निचे आ गया और जंगली के बाकि जानवरों को बुलाया और बताया की इस पेड़ पे सच में भूत  है।

शेर :- वो तो हम पहले से जानते हैं , लेकिन तुम यहाँ कैसे आ गए ? तुम्हे तो जंगली से निकाल दिया गया था।

गोरिला :- जी हुजूर ! लेकिन मै गया नहीं था। मै छुप कर पेड़ पे रहता था और मै ही भूत बनकर जंगल के जानवरों को डरता था। लेकिन अब तो मै खुद भी डर गया हूँ की उस पेड़ पर भूत है।  
 गोरिला की ये बात सुनते ही बन्दर पेड़ से निचे आ गया।

बन्दर :- भालू की कहानी सुन कर मै समझ गया था की ये इस दूष्ट गोरिला की चाल लगती है। इसका भांडा फोड़ने  के लिए मै भूत की आवाज़ निकाल  रहा था।

गोरिला का राज़ सामने आ गया।  इस बार जंगल के सभी जानवरो ने मिल कर गोरिला को जंगल के बाहर छोड़ दिया।

बन्दर ने बहादुरी से उसका सामना कर के सभी से प्रशंसा  बटोरी।  अब उस पेड़ से किसी को डर नहीं लगता था।  जंगल  फिर से आज़ाद  हो गया था।

कहानी से सीख : इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है की हमे अफवाह पे ध्यान नहीं देना चाहिए और अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको भूतिया बरगद का पेड़ की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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