सैनिक जिसकी आत्मा Indo-china border पर रखवाली करती है|बाबा हरभजन सिंह की जीवनी

 

सैनिक जिसकी आत्मा Indo-china border पर रखवाली करती है । नमस्कार दोस्तों आपका hindikahaniyauniverse.com में स्वागत है। इस blog पे आपको  सैनिक जिसकी आत्मा Indo-china border पर रखवाली करती है | बाबा हरभजन सिंह की जीवनी इन्ही तरह के और भी  Hindi kahaniya पढ़ने को मिलेंगे ।

कहानी की शुरुआत 

आप सभी ने देशभक्ति की बहुत सारी कहानियां सुनी होगी। भारत के वीर सैनिकों के बहादुरी की बहुत सारी कहनियां हैं। कुछ आपने भी सुनी होगी कुछ नही सुनी होगी।

भारत के सैनिक अपने देश के लिये अपनी जान पर खेल जाते है। लेकिन दुश्मनो के मंसूबो को कभी कामयाब नही होने देते।

आप मै आपको जो हिन्दी कहानी सुनाने वाला हूं। वो कहानी है एक देशभक्त की जिसने जिंदा होते हुए तो देश की बहुत सेवा की परंतु मरने के बाद भी उनकी आत्मा काम कर रही है

 यह कहानी है एक ऐसे देशभक्त की जिनकी आत्मा भी अपने काम को नही भूली और काम कर रही है।

यह कहानी है बाबा हरबजन सिंह की। हरबजन सिंह पंजाब रेगिमेंट के सिपाही थे। उनकी आत्मा पिछले 47 साल से भारत की सीमा पर पहरेदारी कर रही है।

 वह देश की सीमा की रक्षा कर रही है। इस बात की पुष्टि वहां तैनात सैनिक और सिक्किम के लोग भी करते हैं।

भारतीय सैनिको का कहना है की हरबजन सिंह की आत्मा चीन की तरफ से होने वाले खतरो का पहले ही भारतीय सैनिको को आगाह कर देती है।

 और अगर भरतीय सैनिको को चीन की कोई हर्क़त पसंद नही आती तो वह चीन के सैनिको को आगाह कर देते हैं ताकी बैठ कर शांती से बात हो सके।

इस बात को चीन भी स्वीकार करता है। इसलिए हर भारत और चीन【Horror stories in hindi】मीटिंग मे एक कुर्सी खाली छोड़ दी जाती है। ताकी हरबजन सिंह भी मीटिंग मे शामिल हो सके। 

बाबा हरबजन सिंह का जन्म कब और कहा हुआ था?

बाबा हरबजन सिंह का जन्म 30 अगस्त 1946 को जिला गुजरावाला मे हुआ था।

 मौजूद समय मे यह जिला पाकिस्तान मे है। हरबजन सिंह 24 वें पंजाब रेगिमेंट के जवान थे। वह 1966 मे भरतीय सेना मे भर्ती हुए थे।

उनको सेना मे भर्ती हुए 2 साल ही हुए थे। 1968 मे सिक्किम मे एक दुर्घटना हुई जिसमे वह शहीद हो गये।

 3 दीन तक तलाश करने के बाद भी उनके शव का पता नही लग पाया था। तीन दीन बाद भी जब उनका शव नही मिला, तब उन्होने अपने एक साथी के सपने मे आ कर खुद अपने शव की जगह बताई। 

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सुबह सैनिको की एक टुकड़ी जब उनके शव को ढूंढने निकली तब उनका शव ठीक उसी जगह पर मिला जहां हरबजन सिंह ने बताया था। बाद मे उनका अंतिम संस्कार पुरे राज्य के सम्मान के साथ किया गया।

इस घटना के बाद सैनिको को हरबजन सिंह की प्रति आस्था बढ गई। उन्होने हरबजन सिंह के बंकर को मंदिर का रूप दे दिया।

बाद मे जब उनके चमत्कार बढ़ने लगे और लोगो की आस्था उनके प्रति बढ़ने लगी। तब उनके लिये एक नये मंदिर का निर्माण किया। जो की बाबा हरबजन सिंह के नाम से प्रसिद्ध है।

बाबा हरबजन का मंदिर | बाबा हरभजन सिंह की जीवनी

यह मंदिर गंगटोक मे जेलेल्पा दरे और नाथुला दरे के बिच 13000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। बंकर वाला मंदिर इसे 1000 फीट उपर है।

मंदिर के अंदर बाबा हरबजन सिंह की एक फोटो और उनका सामान रखा है। वह अपनी मृत्यु के बाद से आज तक अपनी ड्यूटी देते आ रहे हैं। इसके लिये उन्हे तन्ख्वाह भी दी जाती है।

बाबा हरबजन सिंह का मंदिर सैनिकों और आम लोगो के लिये आस्था का केन्द्र है। इस इलाके मे आने वाला हर नया सैनिक बाबा के मंदिर मे माथा टेकने जाता है।

बाबा हरबजन सिंह मंदिर की अजीब सी आस्था

यहां के लोगो को मनना है की अगर बोतल मे पानी भर कर इस मंदिर मे तीन दिन के लिये रख दिया जाये तो उस पानी मे चमत्कारी औषधय गुण आ जाते हैं।

 इस पानी को पीने से रोग खत्म हो जाते हैं। इसलिए इस मंदिर मे बोतलो का अम्बार लगा रहता है।

लोग नाम लिख कर बोतल रख देते हैं। यह पानी 21 दिन बाद प्रयोग किया जाता है। इस दौरान शराब और मांसहारी खाना नही खाया जाता। 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको सैनिक जिसकी आत्मा Indo-china border पर रखवाली करती है|बाबा हरभजन सिंह की जीवनी  की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी 

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