दो बैलो की कथा (Do bailo ki katha)|Hindi kahaniya

दो बैलो की कथा (Do bailo ki katha): premchand|Hindi kahaniya for class 9th

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कहानी की शुरुआत ।

झूरी नाम का एक किसान था। जिसके पास दो बैल थे। एक का नाम हीरा था दूसरें का नाम मोती था। 
दोनो बैल कद मे उच्चे, देखने मे बहुत सुन्दर और काम करने मे अवल थे। दोनो बैलो के आपस मे बहुत प्रेम था वह एक दुसरे को चाट कर, सिंह लड़ाकर अपना प्रेम दिखाते थे। दोनो बैल अपने मालिक से बहुत प्रेम करते थे।

एक दिन झूरी ने अपनी पत्नी के आग्रह पर दोनो बैलो को अपने शशुराल कुछ काम करने के लिये भेज दिया। लेकिन दोनो बैलो ने यह नही समझा की उन्हे क्यू भेजा जा रहा है। 
उन्हे लगा की उसके मालिक ने उन दोनो को बेच दिया है। इसलिए उन दोनो बैलो ने झूरी के साले को पुरे रास्ते बहुत परेशान किया।  
 शाम  होते होते वह गया के घर पहुँच गये। दोनो बैल दिन भर चलने के कारन थक गये थे और उन्हे भूख भी बहुत लगी थी। जब गया ने उन्हे खाने को दिया दोनो बैलो ने खाना नही खाया। 
वह बहुत उदास थे उनका दिल भारी हो रहा था वह सोच रहे थे उन्होने जिसको अपना घर समझा था वह अब उनसे दूर हो चुका था। दोनो अब नये जगह पर थे यहा सब चिज उनके लिये नया था। 【Hindi kahaniya】
 
दोनो बैलो ने आपस मे सलाह किया और रात होते ही दोनो ने जोर लगा कर अपने अपने पघे (रस्सी जिसे बन्धे थे) तोड लिया। और दोनो अपने मालिक के घर की तरफ रात मे निकल पड़े। झूरी जब सुबह उठा दोनो बैलो को अपने दरवाजे पर देख उसका दिल गद गद हो गया। 
दोनो बैलो के गर्दन मे आधे आधे रस्सी लटके हुए थे। उनके पैर कीचड़ से सने थे और उनकी आंखो मे झूरी के लिये प्रेम था। झूरी यह सब देख दौड़ कर दोनो बैलो को गले लगा लेता है और उन्हे चूमने लगता है। यह सब देख झूरी की पत्नी बोल पडी कैसे नमक हराम बैल हैं। एक दिन काम भी नही किया और भाग खड़े हुए। 
 
झूरी अपने बैलो के लिये यह सब सुन ना सका और बोल पड़ा नमक हराम क्यू है। गया ने इन्हे खाने के लिये चारे नही दिया होगा तभी तो भाग आये।
 झूरी की पत्नी बोलती है तुम्ही तो बस खाना खिलाते हो बाकी लोग पानी पिला कर रखते हैं। झूरी ने अपनी पत्नी को चिढाते हुए बोला चारा मिलता तो क्यू भागते। 【Hindi kahani】

दुसरे दिन गया फिर से झूरी के घर आ गया। इस बार गया ने बैलो को बैलगाड़ी मे जोतकर ले जाना ठीक समझा ताकी फिर से बैल उसे परेशान ना कर सके। रास्ते मे मोती ने 3-4 बार गाड़ी को खाई मे गीरने की कोशिश की लेकिन हीरा ने सम्भाल लिया।

 क्युंकि खाई मे गीरने पर चोट उन दोनो को ही लगती। हीरा ज्यादा समझदार था। संध्या समय घर पहुँचने पर दोनो को मोटी रस्सी से बांध दिया गया। 【do bailon  ki  katha moral story】
 हीरा मोती को कल की शरारत की सजा देने के लिये गया ने उन्हे फिर से सुखा भूसा खाने को दिया। जबकी अपनी घर के बैलो को चुनी चोकर सब कुछ दिया। दोनो बैलो का ऐसा अपमान कभी नही हुआ था।
 ना ही ऐसा खाने को मिला था। दोनो ने नाद मे दिये खाने के तरफ नाक तक नही उठाया। अगली सुबह गया ने हीरा-मोती को हल मे जोता लेकिन दोनो बैलो ने अपने कदम मानो जमा लिया हो। वह आगे बढ ही नही रहे थे। गया ने उन्हे डंडा से मारा वह मारते मारते थक गया लेकिन बैल एक कदम नही हिले। 【Hindi kahaniya for kids】

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अंत मे गया ने हार मान कर उन्हे नाद पर ला कर बांध दिया और कल की ही तरह उन्हे सुखा भूसा दाल दिया। दोनो बैल एक दुसरे के तरफ देख रहे थे। घरवालो ने अभी खाना नही खाया था।
 तभी घर के अंदर से एक छोटी बच्ची अपने हाथो मे 2 रोटी ले कर आती है और उन्हे खिला देती है। उस रोटी से तो उनकी भूख खत्म नही हूई। लेकिन उन्का दिल भर गया। दो चार दिन बीत गये वह छोटी सी लड़की जो भौरि थी उसकी मां नही थी। 
उसकी सौतेली मां उसे बहुत मारती थी। इसे देख दोनो बैलो की आत्मनियता बढ गई। दोनो दिन भर खेतो मे हल जोतते,दंडे खाते और शाम मे वही रुखा सुखा भूसा मिलता खाने मे बस रात मे वह बच्ची दोनो को रोटियां खिलाती।

 हीरा मोती की दोस्ती उस बच्ची से हो गई थी। एक रात उन्होने वहां से भागने का प्लान बनाया।

रात को दोनो बैलो ने अपनी अपनी रस्सी चबानी शुरू कर दी। रस्सी मोटा होने के कारन वह दोनो ठीक से चबा नही पा रहे थे। तभी घर का दरवाज़ा खुला और वह बच्ची बाहर आई। उसने कहा मै तुम दोनो को खोल देती हूं। 【Moral stories in Hindi】

तुम यहा से भाग जाओ वरना ये लोग तुम्हे काम करा कर मार डालेंगे। यह कह कर बच्ची ने दोनो की रस्सियाँ खोल दीं लेकिन दोनो वही खड़े थे वह सोच रहे थे। ये लोग इस बच्ची का क्या करेंगे जब इन्हे पता चलेगा की हम दोनो भाग गये है। बच्ची के बार बार कहने पर भी हीरा मोती बैल नही जा रहे थे। 
 
तभी बच्ची चिल्ला पडती है। कोई रोको दोनो बैल भाग गये। फूफा के दोनो बैल भाग गये। यह सुनते ही हीरा मोती भागने लगते है। तभी गया बाहर आता है और बैलो के पीछे दौड़ता है।
 लेकिन बैलो ने तेजी से भाग और बहुत दूर आ गये थे। बैल झूरी के घर के रास्ते भूल गये थे और वह गलत रास्ते चले गये थे। हीरा मोती भूख के मारे बहुत परेशान थे। तभी वहा एक हठा कठा सांड उनकी तरफ चला आ रहा था। 【Hindi kahani bacchon ki】
उसे देख बैलो ने भागा नही वही रुके रहे और उसे मुकाबला करने की सोची। सांड ने हीरा पर हमला किया तभी मोती ने पीछे से सांड पर हमला कर दिया। 
जब सांड मोती पर हमला करता हीरा सांड को मारता। सांड इसे परेशान हो कर हीरा को जान से मारने के लिये झपटा तभी मोती ने बगल से आ कर सांड की पेट मे अपने सिंघ घुसा दिया। सांड घायल हो गया।

दोनो बैल वहा से निकल गये और आगे बढ़ने लगे। भूख से दोनो की हालत खराब थी की तभी एक मटर का खेत दिखता है। मोती दौड़ पड़ता है हीरा उसे मना करता है लेकिन भूख के कारन हीरा भी खेत मे घुस जाता है।

 थोडी सी भी घास अबतक नही खाई होती है की 2 आदमी लाठी ले कर दौड़ते हुए आते हैं उन्हे देख दोनो बैल भागने लगते है भागते भागते वह एक दलदल मे फस जाते है।
जिसे उन्हे आदमी पकड़ लेते है। उन दोनो आदमियो ने हीरा मोती बैल को गाँव के काशी घर मे बन्द कर दिया था। वहाँ पहले से भी कुछ जानवर थे।
 3 घोड़े, बकरी,भेडी,गधे,भैसे इत्यादी। उनमें से कुछ तो जमीन पर गीरे पड़े थे। सब की हालत खराब थी किसी के आगे चारा नही था। दोनो बैल सारा दिन इसी आस मे थे की कोई चारा ले कर आयेगा। 【Hindi story for reading】

लेकिन कोई चारा ले कर नही आता है। इसे देख हीरा के मन मे विद्रोह की भावना जाग जाती है। रात होते ही वह जोर जोर से मिट्टी की कच्ची दिवार पर अपना सर मारने लगता है।

 थोडी देर मे दीवाल पर दरारे हो जाती है। इसे देख मोती भी दिवार पर मारने लगता है।
 कुछ देर बाद दीवाल मे एक रस्ता बन जाता है। इसे देख सभी जानवर खड़े हो जाते है। सबसे पहले घोड़े दौडते हुए वहां से भागते है। फिर भैसे, बकरी सब एक एक कर भाग जाते है। 
लेकिन गधे वही खड़े रहते है। मोती ने उन्हे अपने सर से धक्का दे कर बाहर निकाल देता है। हीरा के पैरो मे रस्सी बंधी थी जिसे वह भाग नही सकता था। मोती अपने दोस्त को छोड कर नही भागा उसके पास जा कर बैठ गया। 【Story in hindi】
 
सुबह जब चौकीदारो ने बाड़ी(जिस रास्ते सभी जानवर भागे थे) की हालत देख गुस्से मे दोनो बैलो को खुब पीटा। कुछ दिन ऐसे ही गुजारने के बाद एक दिन नीलामी हूई। एक व्यापारी ने दोनो बैलो हीरा मोती को खरीद लिया। 
दोनो उस व्यापारी के साथ चल पड़े। चलते चलते दोनो मीत्र को लगा की वह उस रास्ते को जानते हैं। गया उन्हे इसी रास्ते ले गया था। आगे बढते ही उन्हे वही खेत मिलने लगे वही गाँव मिलने लगे यह देख उनकी चाल तेज होने लगी।
 उनकी सारी थकान और दुर्बलता दूर हो गई। वह और तेजी से आगे बढ़ने लगे। उन्हे लगा यहा से उनका घर भी नजदीक है। वह जब तक अपने घर नही पहुँच गये तब तक रुके नही। व्यापारी भी उनके पीछे पीछे दौडता चला आ रहा था। 【Moral story for kids】

झूरी अपने घर के बाहर बैठा बैठा धुप खा रहा था और अपने दोनो बैलो के बारे मे सोच रहा था। एका एक उसकी नज़र उसके बैलो पर पडी वह दौडा दौडा ग्या और उन्हे गले लगा लिया। बैलो के आंखो से आंशु बहने लगे यह खुशी के आंशु थे।

 एक झूरी का हाँथ चाट रहा था तो एक झूरी के पैर। तभी व्यापारी वहां आ पहूंचा और झूरी को बोला यह मेरे बैल हैं मै इन्हे नीलामी करा कर ला रहा हूं। 【Do bailon ki katha in hindi】
 व्यापारी झूरी से बाते कर ही रहा था की मोती ने अपना सिंघ चलाया उसे मारने के लिये। व्यापारी भागने लगा मोती उसके पीछे भगा और तब तक व्यापारी को खदेरा जब तक वह गाँव से बाहर नही भाग गया। 
मोती सान से अपने घर लौट आया। थोडी देर मे झूरी ने नाद मे चुनी,चोकर,भूसा घास, दाना लगा दिया। दोनो बैल खाना खाने लगे झूरी वही खड़े हो कर दोनो को सहला रहा था उनकी चोट के निशान देख मन ही मन निराश था। तभी उसकी पत्नी वहां आती है वह भी बैलो को देख खुश होती है और दोनो के माथे चूम लेती है। 

निष्कर्ष 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको दो बैलो की कथा|Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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