जाने असली romeo akbar walter के बारे में based on which person

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रविन्द्र कौशिक कौन है | Romeo akbar walter based on which person 

रविन्द्र कौशिक एक भारतीय एजेंट था। जिसे पाकिस्तान की जाशूसी करने के लिये पाकिस्तान भेजा गया था। 

रविन्द्र को इंद्रा गांधी ने black tiger की उपाधि दी थी। उसके बाद रविन्द्र को black tiger के नाम से भी जाना जाता था। 

रविन्द्र एक ऐसा व्यक्ति था जो रूप बदलने मे बहुत ही माहिर था। आगे देखते हैं रविन्द्र कौशिक उर्फ The Black Tiger की full story।

रविन्द्र का जन्म 11 अप्रैल 1952 मे राजस्थान के श्री गंगा नगर मे एक हिंदू पंडित के घर मे हुआ था। 

उसके पिता का नाम JM kaushik, और माता का नाम Amla देवी था। रविन्द्र ने अपनी graduation तक की पढ़ाई राजस्थान से ही किया था। 

रविन्द्र कौशिक को बचपन से ही acting करने का बहुत सौख था। रविन्द्र को रूप बदल कर बहरूपिया बनने मे महारत हासिल थी।

रविन्द्र की ऐक्टिंग देख कर लखनऊ के एक सेठ ने रविन्द्र को लखनऊ बुलाया। जहां उन्होने एक नाटक मे देशप्रेम/देशभक्त का किरदार अदा किया। 

उस नाटक मे रविन्द्र एक सैनिक बने थे और चीन मे पकडे गये एक कैदी के दर्द को अपनी ऐक्टिंग के जरिये बया कर रहे थे।

 दर्शकों को उनकी ऐक्टिंग सच लग रही थी। उसी भीड मे एक Raw के एक अधिकारी यह नाटक देख रहा था।

उस raw के अधिकारी ने रविन्द्र को कहा “तुम मेरे लिये काम करोगे?” रविन्द्र ने पूछा क्या काम करना होगा? 

अधिकारी ने काम तो नही बतया लेकिन कहा की तुम्हे बहरूपिया बन कर मुसलमान की ऐक्टिंग करनी होगी। रविन्द्र तैयार हो गया काम करने के लिये। 

रविन्द्र के हामी के बाद उसे raw द्वारा एक गुप्त स्थान पर ले जाया गया।

 रविन्द्र की 2 सालो तक ट्रेनिंग चली और इन दो सालो मे यह भी देखा गया की रविन्द्र मे कितना देशप्रेम और धर्म के प्रति आस्था है। 

ऐसा इस लिये किया जाता है की अगर किसी मुस्लिम देश अगर कोई raw का एजेंट पकड़ा जाता है तो वह किस हद तक अपना मुह खोल सकता है।

रविन्द्र हर परीक्षा मे पास हुआ। raw के अधिकारी रबिन्द्र से बहुत खुश थे। अब वह समय आ चुका था की जब रविन्द्र को jimmedari सौपी जाये।

रविन्द्र कौशिक की नई ज़िन्दगी की शूरुआत|romeo akbar walter based on which person 

 एक दिन raw के एक बड़े अधिकारी ने बोला की पाकिस्तान जाओगे? रविन्द्र पकिस्तान जाने के लिये तैयार हो गया।

तुम raw के एक एजेंट बन के पाकिस्तान जाओगे। अगर मर गये तो तुम जानो और तुम्हारा काम, और अगर पकडे गये तो हम तुम्हे नही जानते। 

रबिन्द्र ने कहा मुझे मेरे रूप बदलने की कला पर पूरा भरोषा है। मुझे आज तक कोई पहचान नही पाया है।

रविन्द्र का खतना भी कराया गया उसको मुसलमान की तरह दिन मे 5 बार नमाज पढ़ना भी सिखाया गया। 

उसको पूरी तरह मुसलमान बनाया गया उसका नाम बदल कर मोहमद नबी अहमद शाकिर कर दिया गया था। कुछ दिन उसे मुसलमानो के साथ भी रखा गया था।

उसे raw के अधिकारियों ने कहा की तुम इस बारे मे किसी को मत बताना तक की अपने परिवार को भी नही। तुम्हारे काम के बदले हम तुम्हारे घर पैसे पहूंचा दिया करेंगे। 

रवींद्र ने अपने परिवार को कहा वह दुबई जा रहा है काम करने वह अब वही से पैसे भेजा करेगा। दुबई मे उसकी नौकरी लग गई है।

परिवार से विदा ले कर रविन्द्र अपने मिशन पर निकल गया। 

1975 मे रविन्द्र को 23 साल की उम्र मे सेना की मदद से बॉर्डर पार करा कर पाकिस्तान भेज दिया गया। यहां से उसकी एक नई जिंदगी शुरु हुई।

रविन्द्र ने पाकिस्तान जाते ही सबसे पहले अपना सिनाक़्ती कार्ड बनवाया। साथ ही उसने कराची के एक कॉलेज मे llb मे दाखिला ले लिया।

 llb की डिग्री लेने के बाद एक दिन उसने अखबार मे एक इस्तीहार देखा जिसमे पकिस्तानी सेना मे भर्ती निकली थी।

मौका का फायदा उठाते हुए उसने फॉर्म भर दिया। कुछ समय बाद उसका चयन पाकिस्तानी सेना मे हो गया और वह एक सिपाही बन गये। 

अपने काम से उन्होने पकिस्तानी सेना को बहुत खुश कर दिया था जिसे उनको सेना मे मेजर बना दिया गया था।

रविन्द्र ने अपने सीनियर ऑफिसर जखिबर शेख की बेटी फातिमा से शादी कर लिया। फातिमा से रबिन्द्र प्रेम करते थे। लेकिन उन्होने फातिमा को कभी अपनी सच्चाई नही बताई।

raw मे शादी करना बहुत आम है ऐसा करने से वहां के लोग उन्हे विदेशी नही समझेंगे और इसका एक और फायदा होता है की शादी के बाद उन्हे उस देश मे एक रिशतेदार मिल जाता है। ठीक ऐसा ही रवींद्र उर्फ मोहमद नाबी अहमद शाकिर ने भी किया।

वह भारत को पकिस्तान से जानकारियां भेज रहे थे। इधर raw खुश और उधार पाकिस्तानी सेना उसके काम से खुश थे। 

सब कुछ सही चल रहा था तभी भारतीय मौजूदा सरकार ने रबिन्द्र की मदद के लिये एक और आदमी भेजने का प्लान कर रहा था। 

उस समय कांग्रेस की सरकार थी। इस बारे मे जब रविन्द्र से पूछा गया तब उसने कहा की मुझे किसी की जरुरत नही है।

 मै अकेला ही काम कर लूंगा। लेकिन सरकार के दबाव मे रविन्द्र को हामी भरनी पड़ी। 

रविन्द्र कौशिक कैसे पकड़े गए? How was Ravindra kaushik caught?

प्लान के मुताबिक एक और रॉ के एजेंट को पकिस्तान भेजा गया। जिसका नाम था Inyat Masih । उस एजेंट ने बौर्डर पार कर लिया था बौर्डर पार करने के बाद वह एक होटल मे चाय peene चला गया। 

जहां पहले से ही पकिस्तानी सेना के कुछ सैनिक पहले से ही मौजूद थे। वहां उन्हे उस एजेंट पर सक हो गया।

उन्होने उसे पकड़ लिया और पूछा romeo akbar walter based on which person कौन हो तुम और यहां क्या कर रहे हो? 

उस raw के एजेंट ने कहा मै भारत से आया हूं मेरे दोस्त से मिलने। तभी एक सैनिक ने बोला कौन है तुम्हारा दोस्त? बताओ नही तो यही गोली मार दूँगा।

यह सुनते ही वह डर गया और बोला मै एक raw का एजेंट हूं और यहाँ पहले से मौजूद एक रॉ के एजेंट की मदद करने आया हूं।

 यह सुनते ही सभी सैनिक चौक गये। सैनिको ने पूछा कौन है वो कहां है। इसके जवाब मे उसने बता दिया की वह पाकिस्तानी सेना मे मेजर है। 

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एक सैनिक ने कहा तुम उसे जहां मिलने वाले थे। उसे वही मिलो लेकिन उसे जरा भी सक नही होना चाहिये की यह बात हमे पता है।
 

 उस रॉ एजेंट ने रविन्द्र को अगली सुबह जिन्ना उद्यान मे मिलने बुलाया। रविन्द्र अपने समय पर पहूंच गये थे और उस एजेंट से मिले। पाकिस्तानी फौज जो घात लगाये बैठी थी। उसने रविन्द्र को पकड़ लिया।

रविन्द्र को उस raw के agent पर इतना गुस्सा आया की वह वही उसे पिटने लगे। रविन्द्र को पकिस्तान की अंडरग्राउंड जेल मे 12 दिनो के लिये बंद कर दिया गया था। 

उस जेल मे ना तो सूर्य की रौशनि पहूंचती थी और ना ही चान्द की। वहां उन्हे 12 दिनो तक बिना खाना के रखा गया था। 

उन्हे बस थोड़ा पानी दिया जाता था ताकी वह जिन्दा रहे। वह पानी भी उपर से गिरा कर दिया जाता था जिसे रबिन्द्र को चाट चाट कर पिना पड़ता था।

12 दिन बाद रविन्द्र को अदालत मे पेश किया गया जहां उन्हे फांसी की सजा सुनाई गई।

 लेकिन पाकिस्तान के कुछ मानव अधिकार संस्थयों ने फांसी की सजा को बदलवा कर उम्र कैद मे तबदील करवा दिया था।

रविन्द्र को उस 12 दिन के कैद मे रखने से उनको टीवी और ह्रदय की बिमारी हो गई थी। जिसका किसी ने इलाज भी नही करवाया। 

रविन्द्र की पत्नी फतिमा उनसे मिलने एक बार जेल आई थी। उसने बस यही पूछा ऐसा क्यूं किया मेरे साथ तब रविन्द्र ने जवाब देते हुए कहा अपने देश के लिये।

रविन्द्र पकिस्तान की जेल से अपने घर हिन्दूस्तान मे खत भी लिखा करते थे। जो आज भी उनके घर पर मौजूद है। उस खत मे रविन्द्र ने लिखा है।

 मै कोई दुबई कमाने नही गया,मै पाकिस्तान मे पाकिस्तान की जासूसी करने आया था जहां मुझे भारत सरकार की गलती के कारन मुझे पकड़ लिया गया।

मै तो भारत सरकार के खातिर ही इस पराये मुल्क मे आया था। मैने कई सारी जानकारियां उन्हे दी है। 

सन 1971 के युद्ध को जीतने मे भी मैने बहुत सहयता की है। इंद्रा गांधी ने मुझे black tiger की उपाधि भी दी।

अब मुझे ह्रदय और टीवी रोग हो गया है। जिसका इल्लाज़ इस मुल्क मे नही है। मुझे बचा लो मै भारत की जमीन पर मरना चाहता हूं।

रवींद्र के पिता बार बार नेताओ से मिलते रहे लेकिन उन्होने कहा उसने अग्रीमेंट साइन किया है की अगर वह पकड़ा जाता है तो उसकी कोई सहायता नही की जायेगी। और हम भारत की छवि विश्व मे खराब नही होने देंगे।

सन 2001 मे 21 नवम्बर को 49 साल की उम्र मे पाकिस्तान की कोट लखपत जेल,लाहौर मे उन्होने दम तोड़ दिया।

 भारत सरकार ने रविन्द्र के शव को लेने से भी इनकार कर दिया। पकिस्तान ने रवींद्र के शव को पाकिस्तान के मुल्तान जेल के पीछे दफना दिया।

रवींद्र और फातिमा का एक बेटा भी है जो पाकिस्तान मे रहता है। रविन्द्र इतना बडा बहरूपिया था की मेजर रहते हुए भी वह हिन्दूस्तान अपने परिवार से मिलने 5 बार आये लेकिन किसी को पता नही चला था।

रविन्द्र कितने दिनो तक पकिस्तान के जेल मे थे?

रवींद्र 18 साल पाकिस्तानी जेल मे सजा काटा था। इस दौरान उनको 12 अलग अलग जेलो मे रखा गया था। 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको Romeo akbar walter based on which person की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।

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