जादूई मोती ki kahani | Hindi kahaniya

जादूई मोती ki kahani | Hindi kahaniya

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कहानी की शुरुआत ।

शिवपुर नाम के एक बड़े शहर मे एक लड़का रहता था। वह भगवान गणेश का बहुत बडा भगत था। उस बच्चे का नाम उसकी दादी ने गणेश रखा था।

 गणेश एक कमजोर बच्चा था जो बहुत डरपोक था।इसी कारण  वह अपने स्कूल मे भी बहुत डर कर रहता था। स्कूल के बच्चे इसे बहुत तंग करते थे। लेकिन गणेश कुछ नही कर पाता था। एक दिन की बात है गणेश के स्कूल मे एनुअल स्पोर्ट्स डे मनाया जाने वाला था। 
सभी बच्चे अलग अलग खेलो मे भाग ले रहे थे। कोई कब्बडी मे तो कोई रेस मे तो कोई फुटबॉल मे भाग ले रहा था। यह देख कर गणेश ने भी रेस मे भाग लेने का सोचा। स्कूल खत्म होने के बाद उसने अपना नाम रेस मे लिखवा दिया।
 गणेश को रेस मे भाग लेते देख उसके क्लास के बच्चे वहा आ गये और उन्होने गणेश को कहा तुम अपना नाम रेस मे ना ही दो तो अच्छा है। वैसे भी तुम हारने ही वाले हो। 【Hindi kahani】
यह तुम जैसे डरपोक के लिये नही है। यह सुनने के बाद गणेश अपना नाम रेस से वापस ले लेता है। घर पहुचते ही वह अपने कमरे मे जाता है और रोने लगता है। 
सभी मेरा मजाक उडाते है। मैं कल से स्कूल ही नही जाउंग इसे वो लोग मेरा मज़ाक नही उड़ाएंगे। गणेश रोते रोते सो गया। उसने सपने मे भगवान गणेश को देखा और अपनी सारी परेशानी बताई। 
गणेश जी ने उसे एक मोती दिया और कहा इस मोती को हमेशा अपने पास रखना यह तुम्हे हर मुस्किल से बचायेगा। यह बोलकर गणेश जी गायब हो गये।
 गणेश जब नीन्द से उठा तो उसने देखा की एक मोती उसके टेबल पर पडी हूई है। मोती को देख वह बहुत खुश होता है। शाम को वह अपने दोस्त के साथ खेलने के लिये पार्क जाता है। 
रास्ते मे एक कुता उसके पीछे पड़ जाता है गणेश दौड़कर भागने लगता है कुता उसका पीछा करता है।  【Moral stories in Hindi】
तभी अचानक उसे याद आता है। उसके पास तो मोती है जो उसे बचा लेगा यह सोच कर वह रूक जाता है और कुत्ते को डरा कर भगा देता है। और बोलता है, अरे! वाह इस मोती ने कमाल कर दिया।
अगले दिन वह स्कूल जाता है। उसने मोती अपने जेब मे रख लिया था। क्लास मे सर ने बोर्ड पे एक सवाल लिखा और सभी बच्चो से पूछने लगे कौन इसे हल करेगा। तभी गणेश ने अपना हाथ उठाया यह देख कर सभी लोग चौंक गये। गणेश ने सवाल हल कर दिया। सर ने उसे वाह वाही दी।
 गणेश अब हर काम करने लगा वो भी बिना डरे। उसने रेस मे अपना नाम फिर से लिखवाया। यह सब देख कर उसके एक दोस्त ने गणेश से पुछा तुम कुछ दिन पहले तक तो बहुत कमजोर थे लेकिन अब तुम बहुत बदल गये हो यह कैसे हुआ?
तब गणेश ने अपनी जेब से मोती निकली और अपने दोस्त को दिखया और सारी बात बताई। यह सुन कर उसके दोस्त ने गणेश से वह मोती एक दिन के लिये मांगने लगा। लेकिन गणेश ने उसे मोती देने से मना कर दिया। उसके बहुत मांगने पर भी गणेश ने उसे मोती नही दी और वहा से चला गया।

एक दिन गणेश के दोस्त को स्कूल के मैदान मे एक मोती मिला जो बिल्कुल वैसा ही था जो गणेश जी ने गणेश को दिया था। वह खुश हो जाता है और मोती अपने पास रख लेता है। कुछ दिनो बाद जब स्कूल मे एनुअल स्पोट्र्स डे आया। 【Hindi kahaniya】

 तब गणेश ने रेस मे दौडा और रेस जीत लिया। यह देख कर सभी लोग दंग रह गये। तभी गणेश के दोस्त ने बोला की तुम यह रेस कैसे जीत गये? तुम्हारा जादुई मोती तो मेरे पास है। इसके होने के बाद भी मै हार गया। 
तुम झूठ बोल रहे थे इस मोती के बारे मे। यह सब वहां खड़े एक टीचर ने सुन लिया और कहा यह सब गणेश के अंदर जो आत्मविश्वास जागा है यह सब उसकी के कारन हुआ है। यह कोई मोती का कमाल नही है।
गणेश रेस जीत कर घर जाता है वह बहुत खुशी से अपने घरवालो को बताता है। वह 1st आया घर वाले बहुत खुश होते है। गणेश की दादी ने उसे पुछा  गणेश क्या तुमने एक मोती देखा है। मेरे माला की एक मोती खो गई है और बहुत दिन से मिल नही रहा है। 
तभी गणेश ने मोती दिखाया और पुछा यह है क्या? दादी ने कहा हां, लेकिन तुम्हे कहा मिला। तब उसने बताया की यह उसके टेबल पर था। तब दादी ने कहा सायद तुम्हारी छोटी बहन ने उसे वहा रख दिया होगा। गणेश समझ चुका था की वह कोई भगवान जी का दिया मोती नही था।

सीख :- इंसान को अपने आप पर आत्मविश्वाश होना चाहिये। अगर वह अपने आप पर विश्वास नही करेगा तो अपने जीवन मे कुछ नही कर पायेगा। जादु कुछ नही होता। लेकिन अपने आप पर विश्वाश हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है।

निष्कर्ष 

अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको  jadui moti ki kahani|Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी ।
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