गांधारी के 100 पुत्रो का जन्म कैसे हुआ | Hindi kahaniya

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क्या है कौरवों की जन्म गाथा?  कैसे हूई कौरवों की जन्म?

महाभारत  की कहानी तो आप सभी ने कभी ना कभी सुनी ही होगी। महाभारत मे बहुत सी घटनाए घटी। अधर्म का नास हुआ था और धर्म की जीत। उसी महाभारत के कई पात्र थे। उन्ही मे से एक है गांधारी जिनके गर्व से 100 कौरवों का जन्म हुआ। 
 
 

गांधारी कौन थी?

गांधारी गंधार के राजा सुबल की पुत्री थी। गंधार नरेश ने अपनी पुत्री गांधारी का विवाह हस्तिनापुर के महाराजा धृतराष्ट्र से कराया था। जब गांधारी को पता चला की उसके होने वाले पति बचपन से ही नेत्रहीन है।

तब गांधारी बहुत उदास हूई और उसने अपनी पत्नीधर्म निभाते हुए। अपने आंखो पर पाटी बांध ली। गांधारी अपनी आंखे होते हुए नेत्रहीन रहने का निर्णय ले लिया।
 
गांधारी भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थी। उन्हे धर्मीक कामो मे बहुत रुचि रहती थी। वह भगवान शिव की आराधना करती थी।
 

गांधारी को 100 पुत्रो का वरदान कैसे मिला ?

गांधारी विवाह के बाद हस्तिनापुर आ गई। जैसा की गांधारी को धार्मिक कामो मे बहुत रुचि थी। वह बहुत मन से ऋषि और साधुओ का आदर सत्कार करती थी।

एक दिन की बात है। महर्षि वेद व्यास हस्तिनापुर आये। गांधारी ने उनकी बहुत सेवा की उनका आदर सम्मान किया।

महर्षि गांधारी की सेवा से बहुत प्रसन्न हुए। और उन्होने गांधारी को कहा मै तुम्हारी सेवा से बहुत प्रसन्न हूं पुत्री। तुम मुझसे एक वरदान मांगो। गांधारी ने महर्षि के कहने पर अपने पति जैसे 100 ताकतवर पुत्र की कामना की। महर्षि वेद व्यास से गांधारी को 100 पुत्रो का वरदान मिला।

 

100 कौरवों का जन्म कैसे हुआ? Hindi kahaniya

जब गांधारी समय आने पर गर्ववती हूई। 2 वर्ष बीत गये थे गांधारी को गर्व धरण किये हुए। फिर भी बच्चो का जन्म नही हुआ। इस बात से गांधारी बहुत चिंतित थी।

 एक दिन गांधारी क्रोध मे आ गई और उन्होने अपने पेट पर जोर-जोर से मुक्के मारने लगी। जिसके कारन गर्व गीर गया और गर्व से एक लोहे जैसा मांस का एक पिंड निकला । महर्षि ने अपनी दिव्य दृस्टी से ये सब देख लिया था। वह तुरंत हस्तिनापुर आ पधारे।
 

महर्षि ने गांधारी को 100 कुंडो  मे घी भर कर रखने को कहा। गांधारी ने वैसा ही किया। फिर महर्षि ने उस मांस की पिंड पर गांधारी को पानी छिडकने को कहा गांधारी के पानी छिड़कते ही वह 100 मांस की टुकड़ो मे बट गया।

 उन टुकड़ो को 100 घी के कुंडों मे एक एक कर डाल दिया गया। महर्षि ने साथ ही कहा की इन कुंडो को 2 वर्ष बाद ही खोलना।
 

दो साल बाद उन कुंडो मे से सबसे पहले दुर्योधन निकला। उसके बाद सभी 99 और निकले । इस प्रकार जन्म हुआ 100 कौरवों का। माना जाता है की दुर्योधन के जन्म होने पर ऋषि मुनियों ने भविष्यवाणी की थी की दुर्योधन कुल के विनाशक होंगे। [Hindi kahaniya] 

 इसिलिए महाराज ध्रतराष्ट्र और गांधारी को उस पुत्र का त्याग करना होगा। परंतु उन्होने पुत्र मोह मे ऐसा नही किया। उन्होने उसको पाल पोस कर बडा करने का निर्णय लिया।
 

आगे चल कर दुर्योधन ही महाभारत का कारन बना। जिसे कौरवों का विनाश हुआ। साथ ही कौरव कुल का भी अंत हो गया।

दुर्योधन की एक बहन भी थी। जिसका  नाम दुर्सला था। वह गान्धारी और धृतराष्ट्र की एकलौती पुत्री थी। जिसका विवाह जयद्रथ से हुआ था। जो की सिन्धु के राजा हुआ करते थे।
 
जयद्रथ के पिता वृद्रथ को यह वरदान प्राप्त था की उसके पुत्र का कोई समान्य व्यक्ति वध नही कर सकता था। जो भी जयद्रथ को मार कर उसके शीष को धरती पर गिरायेगा उसका शीष के हजारो टुकडे हो जायेंगे। बाद मे महाभारत के दौरान अर्जून ने ही जयद्रथ का वध किया था।
 

गांधारी का वरदान दुर्योधन को

गांधारी के पास अपने किसी एक पुत्र को जीवित बचाने की शक्ति थी। गांधारी ने दुर्योधन को बचाने का निर्णय किया।

 महाभारत के दौरान जब एक सही मुह्रत मे गांधारी अपने जिस भी पुत्र को निर्वस्त देखती उसका शरीर लोहे का हो जाता।
 
 उसे कोई मार नही पाता। परंतु जब दुर्योधन यह वरदान पाने अपनी माँ गांधारी के पास जा रहा था। तभी कृष्णा जी ने दुर्योधन को कहा इतने बड़े हो कर अपनी मां के पास ऐसे जाओगे।
 
 तभी दुर्योधन ने केले का पत्ता पहन लिया। जिसे जब गांधारी ने अपनी आंख खोली उसका शरीर लोहे का हो गया। शिवये उन अंगो के जहा केले का पत्ता था।
 

दुनिया ने उसे बदसूरत बतख समझा पर वो लोगो के सोच से परे था। आइए देखे कैसे ।

गान्धारी ने कृष्ण को क्या श्राप दिया?

गांधारी अपने 100 पुत्रो की मृत्यु के बाद बहुत विलाप कर रही थी। वह बहुत दुखी थी। उसने युध्द ना रोकने का जिम्मेदार कृष्ण को ठहराया। जिसके कारन उसके 100 पुत्र मारे गये। जिसे कौरवों का वंश खत्म हो गया। गान्धारी ने कृष्ण को श्राप दिया की जिस प्रकार कौरवों के वंश का अंत हुआ । उसी प्रकार यादवों के वंस का भी अंत हो जायेगा।  [Hindi kahaniya] 

वह आपस मे ही लड़ झगड कर खत्म हो जायेंगे। और पुरा वृंदावन पानी मे डुब जायेगा।
 

कुछ सालो बाद ऐसा ही हुआ और यादवों का वंस भी खत्म हो गया।

धन्यवाद।

निष्कर्ष
अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको गांधारी के 100 पुत्रो का जन्म कैसे हुआ ?|Hindi kahaniya पसंद आई होगी ।
 
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2 thoughts on “गांधारी के 100 पुत्रो का जन्म कैसे हुआ | Hindi kahaniya”

  1. जब सवाल हिंदी में है तो जवाब भी हिंदी में ही लिखते …… इंग्लिश सबको सुविधाजनक नहीं होती….

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