क्रेन और कोबरा |Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi

क्रेन और कोबरा 

क्रेन और कोबरा का संक्षिप्त वर्णन| Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi

क्रेन और कोबरा |Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi: इस कहानी में एक क्रेन जिसके बच्चों को कोबरा   [Hindi kahaniya]  खा जाता था। अपने बच्चों को बचाने के लिए क्रेन ने क्या किया आये देखे।   [Hindi kahaniya] 

एक बार एक बड़े बरगद के पेड़ पर गहरी जंगल में एक क्रेन का परिवार रहता था।परिवार मे एक माँ और उसके छोटे छोटे बच्चे रहते थे।माँ क्रेन को हर रोज अपने बच्चो के पेट भरने के लिये भोजन लाने के लिये उड़ना पड़ता था।उसी बरगद के पेड़ में एक बड़ा कोबरा रहता था।

जो हमेशा भोजन की तलाश में होता था जब उसने  छोटे क्रेन के बच्चे को देखा।  वह जानता  था  कि वे यहाँ से खुद से उड़ नहीं सकते। इसका फायदा कोबरा ने उठाया और उसने उन्हें खा लिया।

जब माँ क्रेन वापस आई वो उन्हें ना  देखकर हैरान रह गई । वह बहुत दुखी थी,कुछ महीने बाद उसने फिर से  क्रेन को जन्म दिया।बच्चों को फिर से बुरे कोबरा ने खा लिया।  [Hindi kahani]

माँ क्रेन बहुत परेशान थी और इस बारे उसने कोबरा से बदला लेने के लिये एक क्रैब से मदद मांगी ।क्रैब जो आसपास रहता था हालांकि क्रेन को उस क्रैब पर भी पुरा भरोषा नहीं था। क्रेन ने क्रैब  से कहा की वो उसकी कोबरा से छूटकारा  पाने मे मदद करे।

खरगोश अपनी कमजोरी से तंग आ कर मरने जा रहे थे। फिर वो वापस लौट गये ऐसा क्यू? आइए देखे

क्रेन :-कोबरा जो मेरे बच्चो को खा जाता है। मेरे बहुत सारे बच्चों को वो बुरा कोबरा खा चूका है।क्रैब  कृपया आप मेरी मदद करें आप भी एक माँ हैं आप कैसे खड़े हो सकते हो और  अपने बच्चों को मरते  हुए देख सकते हो। मेरी मदद करो और  मुझे सलाह दो क्या करना चाहिए? क्रैब ने क्रेन की मदद की।

क्रेन और कोबरा |Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi

क्रैब ने एक प्लान बनाया पास में एक नेवला रहता है अगर आप मांस का निशान छोड़ते हुए  कोबरा के बिल तक पहुंचा  दे। तो नेवला मांश का पीछा करते करते। वह कोबरे के बिल तक पहुंच जायेगा और कोबरा को मार डालेगा और आपके बच्चे सुरक्षित रहेंगे।

क्रेन :-यह एक शानदार योजना है। धन्यवाद, आपका बहुत बहुत आभार  है

क्रेन माँ ने पूरी तरह से प्लान के अनुशार  मांस  लाया और टुकड़े गिराने लगी।नेवला मांस का पीछा करते करते कोबरा के बिल तक  पहुँच गया। वह कोबरा को देखा और दोनो मे लडाई हूई। नेवले ने कोबरा को मात दी और उसे खा गया।

अब नेवले  ने पेड़ के उपर देखा । उसे क्रेन का घोसला दिखा उस घोसले मे क्रेन के बच्चे थे। नेवले ने उन्हे भी खा गया।  [Moral stories in hindi]

क्रेन माँ ने अपने बच्चों को फिर से खो दिया।सिर्फ इसलिए कि उसके पास दूरदर्शिता नहीं थी।

कहानी की सीख:- इस हिन्दी कहानी से हमे यह सीख मिलती  है की हमे मुसीबत मे भी दूरदर्शिता द्रिष्टी  का एहसास होना चाहिए है।

crane aur cobra

Ek baar ek bade baragad ke ped par gaharee jangal mein. ek parivaar rahata tha.

parivaar me maa aur chote bacche rahte the. har roj maan ko apne ghoshale se udna padta tha. taki wo apne bacchon ke liye khane ke liye ,unka pet bharne ke liye kuch laa sake.

usi bargad ke ped ki neeche ek cobra rahta tha.jo hamesha apni khane ki taslash me bhatakta rahta tha. cobra ne dekha ki bacche aapne aap udd nhi skte the toh usne crane ke bacchon ko kha liya.

jab maa crane  vaapas aaee to vah bahut dukhi aur udas ho gai thee unhen dekhakar hairaan rah gae. kuch maheene baad  usane aur crane ko janm diya bachchon ko phir se buraee kobara ne kha liya.

maa crane bahut pareshan ho gai thi. usne ek crab se madad mangi.jo ki pass me hi rahti thi. crane ko crab pe ve pura bharosha nhi tha. lekin wo vee ek maa thi.  [Hindi kahaniya]

usne crab se kaha oo priye crab meri madad karein ek cobra mere chote chote bacchon ko kha jata hai.jab me ghoshale me nhi rahti.

crab ne ek plan banaya pass me hi ek newlaa rahta tha. agar tum maansh ke chote chote tukde ko cobra ke bill tak rakh do.to newlaa uska picha karte karte. uske bill tak pahuch jayega. Aur use kha jayega.

क्रेन और कोबरा |Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi

crane ne thik aisa hi kiya aur mansh ke tukde ko cobra ke bill tak rakh diya. newlaa usko khate khate cobra ke bill tak jaa pahucha . waha usne cobra se ladai ki aur usse maar diya.  aur usko kha gaya.

मेढक ने अपने अपमान का बदला कैसे लिया? आइये देखते है|

usne ped ke uppar ek ghosla dekha jo ki crane ka tha usme bacche the. newale ne unhe bhi kha liya.

crane maa ne ek baar phir apne bacchon ko kho diya. aur aisa isiliye Hua kyun ki crane ke pass durdarshita drishti nhi thi.usne aage ki nhi sochi ki newlaa uske baccho ko bhi kha sakta hai.

kahani ki seekh: Iss kahani se hame yahi Sikh lena chahiye ki musheebat me bhee hm apni aage ki soch kho na dee. hme hamesha aage ki soch lena chahiye jab bhee koi phaisala lee ya koi  plan banaye.

Nishkarsh

Agar aap yah padh rahe h to yaha tak aane k liye dhanyawad mujhe asha h ki aapko क्रेन और कोबरा |Hindi kahaniya|Hindi kahani|Moral stories in hindi Pasand aayi hogi ..
Aur Romanchak kahaniya h niche padhe…

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