एक बूढ़ा किसान और उसके चार बेटे जो एक दूसरे के खून के प्यासे थे|Hindi kahaniya

एक बूढ़ा किसान और उसके चार बेटे जो एक दूसरे के खून के प्यासे थे|Hindi kahaniyaनमस्कार दोस्तों  आपका hindikahaniyauniverse.com में स्वागत है। इस blog पे आपको एक बूढ़ा किसान और उसके चार बेटे जो एक दूसरे के खून के प्यासे थे|Hindi kahaniya इन्ही तरह के और भी  Hindi kahaniya पढ़ने को मिलेंगे ।

कहानी की शुरुआत 

एक छोटे से गांव मे एक बूढ़ा किसान आपने चार बेटे के साथ रहता था। बूढ़ा किसान हमेशा चिंतित रहते थे। 

उसके बेटे आपस मे लड़ते रहते थे। किसान उन्हे बहुत समझाता था लेकिन फिर भी उनपर कोई असर नही पड़ता था। चारो भाई एक दुसरे की कोई मदद नही करते थे। हमेशा बस लड़ते रहते थे। 

समय बितता गया बूढ़ा किसान और बूढ़ा हो गया। उसके बेटे अभी भी आपस मे लड़ते ही रहते थे। किसान अपने बेटों को लेकर बहुत परेशान रहता था। 

किसान की तरकीब|Hindi kahaniya

एक दिन किसान ने अपने बेटों को सबक सिखाने का फैसला किया। उसने अपने सभी बेटे को बुलाया और उन्हे एक लकडीयों का गट्टा दिया और बोला मेरे बच्चो यह एक साधरण लकडीयों का गट्टा है तुम इसे दो हिस्सो मे तोड़ दो। ऐसा करने का सभी को बराबर मौका मिलेगा।

इसमे भी चारो भाई आपस मे लड़ने लगे और एक दुसरे को नीचा दिखने लगे। तब किसान बोला अब लड़ना बंद करो और जैसा मै बोल रहा हूं वैसा करो।

सबसे पहले किसान के बड़े बेटे ने लकड़ीयों का गट्टा लिया और तोड़ने लगा,काफी प्रयाश के बाद उससे लकड़ी नही टूटी।

उसने हार मान ली। दुसरे भाई 【Moral stories in hindi】ने भी कोशिश की लेकिन वह भी असफल रहा। बाकी के दो भाईयों ने भी प्रयाश किया लेकिन वह तोड़ नही पाये।

सब लोगो ने हार मान ली,और अपने पिता से बोलने लगे यह तो बक्वाश है पिता जी, आपने हमे ऐसा करने को क्यूं बोला। किसान ने कुछ नही बोला और लड़कियो का गट्टा लिया और उसमे से एक एक लकड़ी लिया और सभी को दिया। 

किसान का ज्ञान|एक किसान और उसके चार आलसी बेटे

और बोला अब तोडो सभी भाईयों ने लकड़ी को आसानी से तोड़ दिया। किसान बोलता है, मेरे बेटों तुम इसे कुछ सीखो केवल एक लकड़ी आसानी से तोड़ दी जाती है लेकिन अगर चार लकड़ी एक साथ रखो तो उसे तोड़ना मुस्किल होता है। 

तुम सभी इस लकड़ीयों की तरह हो। अगर तुम सभी साथ रहोगे, तुम्हारा कोई भी बाल भी बाका नही कर सकता। इस बार सभी बेटों को यह बात अच्छे से समझ आ गई । 

चारो भाईयों ने आपस मे लड़ना बंद कर दिया और सब साथ मिल जुल कर रहने लगे और काम करने लगे। 

चारो बेटों को समझ आ गया था की एकता मे ही ताकत है। ऐसा कर के उन्होने अच्छे से खेती की और बहुत अनाज उगाया। किसान यह देख बहुत खुश था।

सीख:- एकता मे ही असली ताकत है। अकेली लकड़ी को कोई भी तोड़ सकता है। परंतु जब वह लकड़ी एक जूट हो जाये तो उसे तोड़ना बहुत मुस्किल है। हमारे जीवन मे भी यही होता है। 

 

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अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो यहां तक आने के लिये धन्यवाद मुझे आशा है की आपको  एक बूढ़ा किसान और उसके चार बेटे जो एक दूसरे के खून के प्यासे थे की हिन्दी कहानी पसंद आई होगी 

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